उत्तर प्रदेश के वाराणसी निवासी अतुल मिश्रा ने बताया कि मैं और मेरी पत्नी बस के अगले हिस्से के दरवाजे वाली सीट पर बैठे थे। अचानक से बस के सामने शीशे टूट गए। इससे पहले कि कुछ समझ आता, चारों से चिंगारी निकलने जैसी आवाजें आने लगीं। यह आवाजें चारों तरफ बस के शीशे टूटने की थीं। मैंने अपनी पत्नी को पकड़ा और सीट से खड़े होकर बस के फर्श पर बैठ गए। बस में बैठे अन्य यात्री चीखने चिल्लाने लगे। बहुत से यात्री बचाओ बचाओ की गुहार लगाने लगे। चीख पुकार मचते ही बाहर से गोलियां चलने लगीं। बस में बैठे कुछ यात्रियों ने एक दूसरे को इशारा करके चुप रहने को कहा तो दो मिनट तक गोलियां चलना बंद हो गईं। इतने में बस डगमगाने लगी और फिर से यात्री चीखने चिल्लाने लगे। तब बाहर से फिर से फायरिंग शुरू हो गई।
मेरठ के रहने वाले तरुण ने बताया कि वह बस के मध्य में ही सीट पर सोया हुआ था। अचानक से बस के शीशे टूटने की आवाज आई। उसकी नींद खुली और वह सीट से खड़े होकर बस के फर्श पर बैठ गया। एक दो मिनट के बाद ही बस डगमगाने लगी। कभी वह छत से टकराए तो कभी निचले हिस्से पर। सड़क से बस लहराते हुए खाई में पत्थरों से टकराती हुई एक जगह जाकर रुक गई, लेकिन बस के खाई में गिरने और फिर पत्थरों से टकराने के बाद रुकने तक भी बस पर गोलियां चलती रहीं। तरुण अपने दो मामा पवन और राकेश के साथ शिवखोड़ी आया हुआ था।