घाटी में अलगाववादियों की बढ़ती सक्रियता और लगातार राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। राज्य सरकार भी इस मसले पर ढील न देने के पक्ष में है ताकि दो महीने बाद शुरू होने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो सके।
ऐसे तत्वों पर हाल ही में मसर्रत आलम तथा जहूर भट्ट की तरह पीएसए के तहत कार्रवाई की जा सकती है। खुफिया एजेंसियों के पास इस बात के इनपुट हैं कि पाकिस्तान इस प्रकार की गतिविधियों में उनकी मदद कर रहा है।
सीमा पार से उन्हें लगातार फोन से निर्देश मिलते रहे हैं। एजेंसियों के पास इस बात की भी जानकारी है कि मुफ्ती सरकार बनने के बाद सात मार्च को जेल से रिहा किए गए मसर्रत को फिर से गिरफ्तार किए जाने से पहले सीमा पार से लगभग एक महीने के दौरान 50 फोन काल आ चुकीं थीं।