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लश्कर के निशाने पर अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

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घाटी में अलगाववादियों की बढ़ती सक्रियता और लगातार राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। राज्य सरकार भी इस मसले पर ढील न देने के पक्ष में है ताकि दो महीने बाद शुरू होने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो सके।
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ऐसे तत्वों पर हाल ही में मसर्रत आलम तथा जहूर भट्ट की तरह पीएसए के तहत कार्रवाई की जा सकती है। खुफिया एजेंसियों के पास इस बात के इनपुट हैं कि पाकिस्तान इस प्रकार की गतिविधियों में उनकी मदद कर रहा है।

सीमा पार से उन्हें लगातार फोन से निर्देश मिलते रहे हैं। एजेंसियों के पास इस बात की भी जानकारी है कि मुफ्ती सरकार बनने के बाद सात मार्च को जेल से रिहा किए गए मसर्रत को फिर से गिरफ्तार किए जाने से पहले सीमा पार से लगभग एक महीने के दौरान 50 फोन काल आ चुकीं थीं।
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एलओसी पर बर्फ पिघलने का इंतजार

खुफिया एजेंसियों ने ये इनपुट मुफ्ती सरकार के साथ शेयर भी किए हैं। कश्मीर में तमाम सुरक्षा एवं इंटेलिजेंस एजेंसियों को भी लगातार सभी अहम जानकारियों और इनपुट को तत्काल साझा करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

लश्कर ए तैयबा के साथ ही मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद ने भी मसर्रत को फोन काल की थी। सैयद अली शाह गिलानी की रैली के दौरान भी हाफिज सईद के फोन आने की बात सामने आई थी।

इन सब बातों को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने मसर्रत को पीएसए में गिरफ्तार कर कोट भलवाल जेल भेज दिया था। एक सप्ताह बाद जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) नेता मकबूल भट्ट के भाई जहूर भट्ट पर भी पीएसए लगा दिया गया। 

सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों की मानें तो एलओसी पर बर्फ पिघलने के बाद पाकिस्तान अधिक से अधिक संख्या में आतंकियों की घुसपैठ कराने की फिराक में है।
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