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श्रीनगर को स्मार्ट सिटी बनाने की राह में बड़ी चुनौती बनेंगे आतंक और हिंसा के हालात

Sun, 25 Jun 2017 12:15 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
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कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन - फोटो : PTI
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श्रीनगर और जम्मू को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल कर केंद्र ने आतंक ग्रस्त इस रियासत के विकास के प्रति वचनबद्धता को प्रमाणित करने की कोशिश की है, लेकिन बिगड़े हालात के कारण स्मार्ट सिटी की राह बहुत आसान नहीं दिखती।
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मजबूत कनेक्टिविटी और डिजीटलीकरण स्मार्ट सिटी की प्रमुख विशेषताओं में शुमार है, जबकि घाटी में हर महीने इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगाने की मजबूरी पैदा हो जाती है। सुशासन, ई गवर्नेंस और नागरिकों की सहभागिता जैसी विशेष सुविधाएं को उपलब्ध कराने में भी आतंक और हिंसा बाधक है। 

अमन का माहौल कायम नहीं होने के कारण पहले से जारी विकास योजनाओं पर ग्रहण लगा है। प्रधानमंत्री के विशेष विकास पैकेज की भी प्रगति धीमी है। 80 हजार करोड़ के इस पैकेज की घोषणा के लगभग दो साल बीत जाने के बाद भी रोजगार के अपेक्षित अवसर पैदा नहीं हो सके। पर्यटन उद्योग तबाह हो गया है। कश्मीरी पंडितों की वापसी की योजना भी अधर में लटकी है। अलगाववादियों के विरोध के कारण पंडितों के लिए सेटेलाइट कालोनी बनाने की योजना टाल दी गई है। 
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स्मार्ट सिटी की राह में कई पेंच और भी

स्मार्ट सिटी परियोजना - फोटो : डेमो फोटो
इस माहौल में स्मार्ट सिटी के लिए योजनाएं लागू करने में दिक्कतें पेश आ सकतीं हैं। भ्रष्टाचार भी एक बड़ी बाधा है। स्मार्ट सिटी की विशेषताओं में नागरिकों की सुरक्षा भी शामिल है। कश्मीर के हालात के दृष्टिकोण से इस विशेषता को भी लागू करने में कठिनाई पेश आ सकती है।

पर्याप्त पेयजल और 24 घंटे की बिजली आपूर्ति की सुविधा के लिए जम्मू कश्मीर को पनबिजली प्रोजेक्टों को पूरा करने की जरूरत होगी। फिलहाल रियासत बाहर से बिजली खरीदने को मजबूर है। उच्च गुणवत्ता वाली परिवहन व्यवस्था, आधारभूत संरचना का निर्माण, उच्च स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा के बेहतर इंतजाम जैसी विशेषताओं के लिए अमन जरूरी होगी।

फिलहाल स्कूल-कालेजों से छात्र-छात्राएं पत्थरबाजी के लिए बाहर निकल आतीं हैं। पिछले साल उपद्रवियों ने 35 स्कूलों को जला दिया था। लगभग 40 भवन क्षतिग्रस्त कर दिए गए थे। बिगड़े हालात के कारण बार-बार स्कूल-कालेजों को बंद करने स्थिति पैदा हुई है। जम्मू शहर के आसपास रोंहिग्या समुदाय की बस्तियां विकसित हो गई हैं। गुज्जरों की भी झुग्गियां है। स्मार्ट सिटी में गरीबों के लिए सस्ते घर उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है। इस प्रावधान को लागू करने के क्रम में रोहिंग्या का मुद्दा फिर गरमा सकता है। स्मार्ट सिटी योजना को लागू करने के क्रम में रियासत सरकार को कई चुनौतियां झेलनी पड़ सकतीं हैं। 
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