लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद ठप पड़ी रहने वाली हाईमास्ट लाइटें अब आसानी से खराब नहीं होंगी। बिजली फूंकने से लेकर रोशनी देने और मरम्मत के लिहाज से बेहद खर्चीली सोडियम लाइटों को पूरी तरह से हटाया जा रहा है।
स्थानीय निकाय निदेशालय के अधीन तमाम 36 स्थानीय निकायों की हाईमास्ट लाइटों को चरणबार बदला जा रहा है। कुल साढे़ तीन हजार एलईडी लाइटों को स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसे चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
दरअसल जम्मू स्थानीय निकाय निदेशालय के अधीन आने वाली नगर परिषद और म्यूनिसिपल कमेटियों में सैकड़ों हाईमास्ट लाइटें लगी हुई हैं।
कहीं पर इन्हें स्थानीय निकाय निदेशालय ने स्थापित किया है, तो कहीं विधायकों, सांसदों और विकास से जुड़ी अन्य एजेंसियों ने।
रात के समय रोशनी के लिए ये लाइटें बेहद जरूरी हैं, लेकिन लाइटें लगाने के बाद इनसे खर्च होने वाली बिजली देनदारी और मरम्मत पर खर्च होने वाली भारी भरकम राशि का बोझ स्थानीय निकायों को सहना पड़ता है।
ज्यादातर स्थानीय निकायों के पास पर्याप्त धनराशि नहीं होने की वजह से लाइटों को त्वरित रूप से ठीक करने की क्षमता नहीं होती।
स्थानीय निकाय निदेशक सौजन्य शर्मा ने बताया कि सोडियम लाइटें 250 वाट की बिजली खर्च करती हैं। लाइट में इग्नाइटर, चोक और बल्ब के तीन अलग-अलग कंपोनेंट होते हैं।
किसी एक के खराब होने पर भी मरम्मत टेढ़ी खीर बन जाती है। उस पर वोल्टेज के घटने बढ़ने का खतरा रहता है। यह समस्या निदेशालय के अधीन आने वाली तमाम 36 इकाइयों में हैं, जिसे देखते हुए 50 वाट क्षमता के साढ़े तीन हजार एलईडी बल्ब लगाए जा रहे हैं।
चालू वित्त वर्ष के अंत तक सभी सोडियम लाइटों को बदल दिया जाएगा। दिन-रात लगातार माता वैष्णो के भक्तों की रौनक से गुलजार रहने वाले आधार शिविर कटड़ा को भी एलईडी बल्ब की रोशनी से लगातार रोशन रखा जाएगा। अकेले कटड़ा स्थानीय निकाय के अधीन ही एक हजार से अधिक एलईडी बल्ब लगाने का काम चल रहा है।