आतंकी हमले में दोनों बेटों को खोने वाली सूरज देवी को सांत्वना देती महिलाएं
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उसे एक जनवरी को ढांगरी में आतंकी हमले में घायल होने के बाद विशेष उपचार के लिए जम्मू शिफ्ट किया गया था। गांव में हुए हमलों में प्रिंस शर्मा के बड़े भाई दीपक कुमार समेत छह लोगों की मौत हो गई थी। एक जनवरी को आतंकियों की फायरिंग में चार लोगों की जान चली गई थी, जबकि दूसरी सुबह आईईडी विस्फोट में दो बच्चों की मौत हो गई थी।
ढांगरी में हथियारों की सफाई करते वीडीसी सदस्य
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हमले में सातवीं मौत पर ग्रामीणों में रोष, बोले- एनआईए करे जांच
आतंकी हमले में सातवीं मौत से ग्रामीणों में भारी रोष है। सरपंच धीरज शर्मा के नेतृत्व में ढांगरी के ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने की मांग की है। उन्होंने कहा, हमले को एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों का पता लगाने में विफल रही हैं। सरपंच ने कहा, हम गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले को तत्काल एनआईए को सौंपने की अपील करते हैं।
ढांगरी हमले में घायल प्रिंस की मौत होने के बाद घर पर जमा लोग
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उन्होंने कहा, एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है लेकिन सुरक्षा एजेंसियां कोई सफलता हासिल करने और दोषियों को सजा दिलाने में विफल रही हैं। हम अपने घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सरपंच ने कहा, उपराज्यपाल ने हमें आश्वासन दिया था कि हमें एक सप्ताह के भीतर आत्मरक्षा के लिए हथियार उपलब्ध करा दिए जाएंगे, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। गांव में एक स्थायी सैन्य शिविर होना चाहिए।
Dangri terror attack
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उन्होंने गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को जीएमसी अस्पताल जम्मू में स्थानांतरित करने में देरी की जांच की भी मांग की। उन्होंने कहा, प्रिंस शर्मा को जीएमसी जम्मू में स्थानांतरित करने से पहले तीन दिनों के लिए जीएमसी राजोेरी में रखा गया। उनकी जान बचाने के लिए उन्हें एम्स दिल्ली या उधमपुर में उत्तरी कमान द्वारा संचालित अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया। इसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच होनी चाहिए। गंभीर रूप से घायल सभी मरीजों को बेहतर इलाज के लिए देश के आधुनिक अस्पतालों में स्थानांतरित किया जाए।
आतंकी हमले में दोनों बेटों को खोने वाली सूरज देवी को सांत्वना देती महिलाएं
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बड़े बेटे की अस्थियां हरिद्वार भेजते ही घर पहुंच गया छोटे बेटे का शव
नियति इतनी क्रूर कैसे हो सकती है। चार साल पहले सूरज देवी ने पति को बीमारी के हाथों खोया था। पिछले रविवार बड़े बेटे दीपक को खोया था। सूरज देवी ने इस रविवार दीपक की अस्थियां हरिद्वार भेजीं ही थीं कि घर पर छोटे बेटे प्रिंस का शव पहुंच गया। सदमे में सूरज देवी बेहोश हो गई और इस घड़ी की गवाह बनने वाली हर आंख से अश्रुधारा फूट पड़ी।
ढांगरी हमले में दोनों भाइयों ने जान गंवाई
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एक जनवरी की शाम को ढांगरी में आतंकियों की फायरिंग में सूरज देवी के बड़े बेटे दीपक की मौत हो गई थी। दीपक की दो दिन बाद ही सेना के ऑर्डिनेंस विभाग में ज्वाइनिंग थी। इसी फायरिंग में छोटा बेटा प्रिंस गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसने रविवार तड़के दम तोड़ दिया। आतंकी हमले ने सूरज देवी की दुनिया ही उजाड़ दी है।
ढांगरी हमले में घायल प्रिंस के शव को ले जाते लोग
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दीपक की मौत के बाद रविवार को छोटे बेटे प्रिंस का शव देखकर सूरज देवी बेसुध हो गईं। लोग उन्हें सहारा देने का प्रयास कर रहे थे। होश आता तो वह बदहवास होकर फिर बेहोश हो जातीं। होश आने पर सिर्फ यही कह रही थीं - मेरे बच्चों का क्या कसूर था। उनका ब्याह देखना चाहती थी। उनकी अर्थी उठ रही है। कोई मेरे बच्चों को वापस कर दो या मुझे भी उनके पास भेज दो।
Dangri terror attack
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दोनोें के परिजनों और गांव के अन्य लोगों की जुबान में यही बात थी कि दोनों बेटों के बाद अब अकेली मां का कौन सहारा बनेगा। सूरज देवी हर रोज दोनों बच्चों के घर आने की राह देखा करती थी। आज वो एक बेटे की अस्थियां हरिद्वार भेज कर दूसरे बेटे का शव घर आते देख रही थी।
Dangri terror attack
- फोटो : एजेंसी
ऐसी स्थिति में उस मां पर क्या बीत रही होगी। शाम साढ़े 4 बजे प्रिंस के शव को लेकर अंतिम यात्रा के लिए लोग निकले तो हर तरफ चीख पुकार और आतंकवाद व पाकिस्तान के लिए बद्दुआ निकल रही थीं। दीपक और प्रिंस के एक परिजन अशोक ने बताया कि सरकार चाहे दोनों बेटे की मृत्यु पर मां को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता करेगी, लेकिन क्या सरकार कोई ऐसा सहारा ढूंढ पाएगी जो बुढ़ापे में उस मां का ध्यान रखे। उसकी देखभाल करे और उसके बुढ़ापे का सहारा बने। परिजन के इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था।
ढांगरी में तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबल
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ढांगरी हमले के आतंकियों की तलाश अब राजोरी के साथ किश्तवाड़ और डोडा में भी
राजोरी जिले के ढांगरी में एक और दो जनवरी को हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया सर्च ऑपरेशन राजोरी के बाद अब किश्तवाड़ और डोडा जिले में भी चलाया जा रहा है। दहशतगर्दों की तलाश में सेना और पुलिस की टीमें इन जिलों के गांवों का चप्पा-चप्पा खंगाल रही हैं। तलाशी अभियान का नेतृत्व पुलिस के जीओ रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। शक के घेरे में आए संदिग्ध लोगों से भी कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस को हिरासत में लिए गए संदिग्धोें से महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
राजोरी: एकसाथ जलीं छह चिताएं
- फोटो : रवि वर्मा
राजोरी में लगातार सातवें दिन भी रविवार को पुलिस और सेना ने एक दर्जन से अधिक गांवों में घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ढांगरी गांव के सामूहिक हत्याकांड में शामिल हमलावरों का पता लगाया जा रहा है। यह अभियान पूरे जिले में चल रहा है। राजोेरी के दर्जन भर गांवों की घेराबंदी की गई है। पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की टीमें इन इलाकों में अभियान चला रही हैं। ये गांव सात पुलिस थानों के क्षेत्रीय अधिकार में आते हैं, जिनमें कंडी, बुद्धल, कालाकोट, नौशेरा, धर्मसाल और राजोेरी शामिल हैं। इसी बीच उचित काउंटर इंटेलीजेंस (सीआई) योजना के तहत जिले में बड़े पैमाने पर आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। जम्मू संभाग के अन्य जिलों के अधिकारियों को भी राजोेरी जिले में तैनात कर दिया गया है।
Rajouri Attack
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सीमावर्ती जिले के लिए सरकार द्वारा भेजी गई सीआरपीएफ की अतिरिक्त कंपनियां पहले से ही क्षेत्रों में पहुंच चुकी हैं। उन्हें उग्रवाद विरोधी अभियानों और अल्पसंख्यक आबादी की सुरक्षा के लिए काम पर रखा गया है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सीआरपीएफ की 18 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती एक प्रमुख कदम है और बलों की अतिरिक्त जनशक्ति अभियानों में सहायता करेगी, जिससे सीआई ऑपरेशन को तेज करने में मदद मिलेगी।
किश्तवाड़ में तलाशी अभियान के दौरान सैन्यबल
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बड़े पैमाने पर घेराबंदी और तलाशी अभियान चल रहा है। ढांगरी के हमलावरों की तलाश जारी है। सरकार द्वारा भेजे गए सीआरपीएफ के अतिरिक्त जवानों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। सीआई ऑपरेशन के लिए तैनात हैं। जल्द ही ढांगरी सामूहिक हत्याकांड में शामिल आतंकवादियों को और इनके पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया जाएगा। मोहम्मद असलम, एसएसपी, राजोरी
राजोरी के ढांगरी गांव में तलाशी अभियान चलताा सीआरपीएफ कर्मी
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सेना ने किश्तवाड़-डोडा में आतंकी मददगारों के साथ अन्य घर खंगाले
ढांगरी हमले और गणतंत्र दिवस के मद्देनजर रविवार को किश्तवाड़ में सेना ने आतंकी मददगारों और अन्य लोगों के घरों को खंगाला। आतंकियों के छिपे होने की आशंका पर यह तलाशी अभियान चलाया गया। जिले में चप्पे-चप्पे पर सेना के जवान तैनात हैं। हर नाके पर सुरक्षा बल आतंक के खिलाफ अभियान चलाने में जुटे हैं। किश्तवाड़ में जैश के कुछ आतंकी सरगनाओं का यहां से नाता बताया जा रहा है। रविवार सुबह किश्तवाड़ जिले के पुछाल के निचले हिस्से में कई घरों की सेना ने तलाशी ली। जिला डोडा के ठाठरी इलाके के फख्सू गांव आगिद में आतंकी मददगारों के घरों में भी सर्च ऑपरेशन चलाया गया। आतंकियों के पनाहगारों और उनके सुरक्षित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद आतंक के खिलाफ अभियान ने जोर पकड़ लिया है।