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पाकिस्तान ने भेजा मसर्रत आलम को न्यौता

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पाकिस्तान उच्चायोग ने हाल ही में जेल से छूटे कश्मीरी हर्रियत नेता मसर्रत आलम को पाकिस्तान दिवस(23 मार्च) में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। इस महीने की शुरुआत में मसर्रत आलम को बारामुला जेल से चार साल बाद रिहा किया गया था।
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मसर्रत आलम की रिहाइ के बाद भारतीय राजनीति में भारी उथल-पुथल मच गई थी। इसके बाद जम्मू कश्मीर बीजेपी-पीडीपी के गठबंधन में चल रही सरकार के भविष्य पर प्रश्नचिंह लग गए थे।

लेकिन अब खबर आ रही है कि कट्टरपंथी मुस्लिम लीग का चेयरमैन मसर्रत आलम सोमवार को नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास के समारोह में शामिल नहीं होगा। आलम कहा कि मुझे न्योता मिला है। लेकिन मैं कुछ व्यक्तिगत कारणों के नई दिल्ली नहीं जा रहा हूं। मेरा स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है।
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क्यों मनाते हैं पाकिस्तान दिवस?
ब्रिटिश राज में मुस्लिम लीग ने लाहौर में पाकिस्तान को पूरी तरह स्वायत्त और संप्रभु मुस्लिम देश बनाने का 23 मार्च 1940 को प्रस्ताव रखा जो पास हो गया। इस प्रस्ताव को लाहौर रिजॉल्यूशन और पाकिस्तान रिजॉल्यूशन का नाम दिया गया था।  इसके बाद साल 1956 में इसी दिन पाकिस्तान का अपना पहला संविधान अपनाया गया था।  इसी खुशी में हर साल पाकिस्तान दिवस मनाया जाता है।
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बड़े अलगाववादी नेता इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे

पाकिस्तान उच्चायोग में सोमवार को पाकिस्तान दिवस मनाया जाएगा। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक के साथ कई बड़े अलगाववादी नेता इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। गौरतलब है कि हफ्तेभर पहले ही उच्चायोग की तरफ से इस समारोह का न्योता भेजा गया था।

पाक दिवस समारोह में शामिल होने के लिए मीरवाइज के नेतृत्व में सात अलगाववादियों का दल रविवार को दिल्ली पहुंच था। इस दल में हुर्रियत पार्टी कार्यकारिणी के सदस्य, मीरवाइज, अब्दुल गनी भट, मौलाना अब्बास अंसारी, बिलाल गनी लोन, आगा सैयद हुसैन, मुस्सद्दीक आदिल और मुख्तार अहमद वजा शाम‌िल हैं।

रविवार को भी मीरवाइज ने पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित से भी मुलाकात की थी। बताया गया है कि इस मुलाकात में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा हुई। मीरवाइज ने कहा, 'कश्मीर समस्या एक राजनीतिक मसला है। इसका हल निकालने के लिए जरूरी है कि इसमें सभी पक्षों को शामिल किया जाए।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने पिछले साल अगस्त में दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी थी। इससे पहले पाक के हाई कमिश्नर ने भारत सरकार को नजरअंदाज कर कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मुलाकात की थी।
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