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जम्मू में भी टारगेट किलिंग का खतरा 15 दिन में दबोचे गए दो आतंकी

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जम्मू। कश्मीर की तरह जम्मू में भी टारगेट किलिंग का खतरा बढ़ गया है। आतंकी संगठन जम्मू में हाइब्रिड आतंकियों की मदद से ऐसा कर सकते हैं।
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खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर कश्मीर, पंजाब, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों और अन्य लोगों को अपने साथ जोड़कर जम्मू में वारदातों को अंजाम देने की फिराक में हैं। ऐसे दो प्रयास विफल हो चुके हैं।
बीते 15 दिन में जम्मू शहर में दो आतंकी पकड़े गए हैं, जो शहर में टारगेट किलिंग के लिए आए थे। हालांकि इनको टारगेट मिलने से पहले ही पकड़ लिया गया। इससे पहले किश्तवाड़ में आतंकी संगठन ऐसा कर चुके हैं। यहां संघ और भाजपा नेता की हत्या की जा चुकी है। 26 सितंबर को पुुलिस ने टीआरएफ के ओजी वर्कर को जम्मू के रेलवे स्टेशन के पास पकड़ा था, जो जम्मू में टारगेट किलिंग के लिए आया था। चार दिन पहले भी गांधीनगर से उत्तर प्रदेश का ओजी वर्कर पकड़ा गया। वह भी जम्मू में टारगेट किलिंग के लिए आया था। तीन अक्तूबर को फलाएं मंडाल में पाकिस्तान ने ड्रोन से एके-47 व गोला बारूद भेजा। इसके बाद पुलिस ने इसे लेने आने वाले ओजी वर्कर को अनंतनाग से पकड़ा। इसके पहले जम्मू में बस स्टैंड के पास आईईडी के साथ तीन आतंकी पकड़े गए हैं। जम्मू के बठिंडी से भी आईईडी बरामद की गई। टीआरएफ और लश्कर-ए मुस्तफा कमांडर भी यहां से पकड़े जा चुके हैं। बीते डेढ़ साल से लगातार शहर में ओजी वर्कर पकड़े जा रहे हैं।
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सूत्रों का कहना है कि आतंकी संगठनों के ओजी वर्करों का एक बड़ा नेटवर्क जम्मू में सक्रिय है। इंटरनेट कॉलिंग के जरिये ये लोग पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलरों के संपर्क में हैं। इनसे पूरी रेकी करवाकर और इनको हथियार देने के बाद टारगेट देने का प्रयास किया जा रहा है।
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पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर आतंकियों की धरपकड़ और वारदातें रोकने के लिए काम कर रही हैं। किसी भी तरह की चुनौती से निपटने के लिए पूरा तंत्र सक्षम और सक्रिय है।
- चंदन कोहली, एसएसपी जम्मू
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