संघ प्रमुख ने कहा कि प्रजातंत्र में व्यवस्था बनेगी और बदलेगी। जो फैसला हो गया वह चलना चाहिए। अपनों के साथ अपने विषयों की चर्चा कर फैसले होने चाहिए। लेकिन वर्तमान में व्यवस्थाओं में हम बहुत ज्यादा अतिवादी बनते जा रहे हैं। संसद चलने नहीं दी जाती। जन समस्याओं के समाधान में व्यवधान आता है। मर्यादा होनी चाहिए कि हम सबसे बड़ा देश हैं। अगर इस भाव से देश में काम होगा तो कोई खतरा भारत को छू तक नहीं सकेगा। उन्होंने कहा कि देश को बड़ा बनाते-बनाते 39 साल की आयु में स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हो गई। सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव शहीद हुए। आओ हम सब भी छोटे-छोटे स्वार्थों को छोड़ राष्ट्र को बड़ा बनाएं।