जम्मू कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को एक बार फिर पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा गूंजा। लगभग सभी रिजर्व कैटेगरी के विधायकों ने सदन में अपनी मांग पर हंगामा किया। वह वेल में भी काफी समय तक धरने पर बैठे रहे।
जैसे की सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो कांग्रेस विधायक दल के नेता न्वांग रिग्जिन जोरा ने इस मुद्दे को उठाया। इसके साथ ही वह और असगर करबलाई, डेल्डन नामगयाल व एजाज अहमद खान सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के आरक्षण की बहाली की मांग करते हुए वेल में पहुंच गए।
उन्होंने स्पीकर से मांग की कि प्रश्नकाल को रोका जाए और उनकी मांग पर चर्चा की जाए। उनके पीछे-पीछे भाजपा के दीनानाथ व डा. कृष्णलाल, पीडीपी के चौधरी कमर हुसैन और मुश्ताक तांत्रे भी वेल में आ पहुंचे।
नेकां के जावेद राणा भी आखिर में वेल में पहुंच गए। सभी ने जमकर नारेबाजी की। उन्होंने रिजर्व कैटेगरी के साथ इंसाफ करो के नारे बुलंद किए। इस दौरान स्पीकर कविंद्र गुप्ता ने नारेबाजी कर रहे सदस्यों को अनसुना करते हुए प्रश्नकाल शुरू करने के लिए कहा। कांग्रेस के विधायक विकार रसूल ने अपना सवाल भी पूछना शुरू कर दिया। इस पर वेल में मौजूद विधायकों ने नारेबाजी तेज कर दी और धरने पर बैठ गए।
हंगामा शांत न होते देख ग्रामीण विकास एवं विधि न्याय मामलों के मंत्री अब्दुल हक खान ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि आरक्षण अधिनियम की धारा छह को उच्च न्यायालय ने खारिज किया है। इसके बाद यह मामला सिंगल बेंच के पास पहुंचा और उसके बाद डिवीजन बेंच के पास। अब यह मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। तीन याचिकाएं इस संदर्भ में हैं। उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद ही राज्य सरकार इस संदर्भ में अपना रुख स्पष्ट कर सकती है।