पीओजेके डीपी फ्रंट 1947, 1965, 1971 कैंप एंड नॉन-कैंप के बैनर तले प्रदर्शन कर मुआवजे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री पैकेज के तहत पीओजेके विस्थापितों को एक मुश्त मुआवजा देने के लिए दो हजार करोड़ रुपये मंजूर किए गए, लेकिन उसका पूरा भुगतान नहीं किया गया।
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के विस्थापितों ने पीओजेके डीपी फ्रंट 1947, 1965, 1971 कैंप एंड नॉन-कैंप के बैनर तले प्रदर्शन कर मुआवजे की मांग की। प्रेस क्लब जम्मू के प्रदर्शनी मैदान पर एकत्रित हुए विस्थापितों ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया। प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे प्रधान रिटायर्ड कैप्टन युद्धवीर सिंह चिब ने कहा कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं तो प्रदर्शन तेज कर देंगे। इस दौरान पीड़ितों ने सरकार से एक मुश्त मुआवजे की बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की।
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चिब ने कहा, प्रधानमंत्री पैकेज के तहत पीओजेके विस्थापितों को एक मुश्त मुआवजा देने के लिए दो हजार करोड़ रुपये मंजूर किए गए, लेकिन उसका पूरा भुगतान नहीं किया गया। वर्तमान तक 80 प्रतिशत परिवार को मुआवजे की पहली किश्त मिली है, जबकि दूसरी किश्त जारी करने में देरी हो रही है। सभी पीड़ित परिवारों को मुआवजे की दूसरी किश्त भी जारी की जानी चाहिए। समिति की सिफारिश के अनुसार 24.5 लाख रुपये प्रति परिवार को दूसरी किश्त जारी की जानी है। ऐसे में केंद्र सरकार व जम्मू-कश्मीर से इस किश्त को जल्द जारी करे। उन्होंने कहा कि रोशनी एक्ट के तहत नॉन-कैंप विस्थापितों को भूमि दी गई थी, लेकिन एक्ट खत्म होने से इन परिवारों पर संकट आ गया है। उन्होंने कहा कि मुआवजा जारी न होने की सूरत में आने वाले दिनों में व्यापक आंदोलन छेड़ने की चेतावनी भी दी।
ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण मिले
जम्मू। प्रदेश में मंडल आयोग को लागू करने की मांग को लेकर ओबीसी महासभा ने सोमवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान सदस्यों ने कहा, प्रधानमंत्री के जम्मू दौरे से उन्हें बड़ी उम्मीदें थी, लेकिन सरकार ने एक बार फिर ओबीसी समाज को निराश किया है। 2014 में प्रधानमंत्री ने अपनी चुनावी रैली में ओबीसी समाज को 27 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया था।