जम्मू में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए।
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उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में सहकारिता आंदोलन को कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थों के लिए जानबूझ कर कमजोर किया। इस महत्वपूर्ण आंदोलन को पटरी से उतार दिया, लेकिन प्रदेश सरकार अब इसकी जड़ों को मजबूत करेगी। सरकार प्रत्येक पंचायत में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाएगी। इससे ग्रामीण जीवन स्तर में व्यापक सुधार होगा। महिलाओं व युवाओं के नए सहकारी संगठन के विकास के प्रति भी सरकार प्रयासरत है। वे रविवार को 68वें सहकारिता सप्ताह के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सहकारिता आंदोलन जमीनी स्तर तक पहुंचे। प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है कि महिलाओं व युवाओं के नए संगठन अस्तित्व में आएं। इनके लिए सरकार मदद भी करेगी ताकि यह पुष्पित हो सकें। कहा कि सरकार का नए कृषि सहकारी समितियों के जरिये कृषि और उससे संबद्ध क्षेत्रों के विकास पर जोर है।
आर्थिक अधिकारों की रक्षा व प्रोत्साहन के लिए मिलकर कार्य करना होगा
इससे छोटे व सीमांत किसानों को लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री के सहकार से समृद्धि योजना को तभी साकार किया जा सकता है जब कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, उनकी ब्रांडिंग, बीजों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। डेयरी व हैंडीक्राफ्ट के क्षेत्र में नई गतिविधियां शुरू की जा सकें। उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन न केवल व्यवसाय है, बल्कि यह जीने की कला है। सभी मिलकर साथ काम करते हैं। सबका उद्देश्य एक होता है-समृद्धि, शांति व आत्मनिर्भरता। हमें प्रत्येक व्यक्ति के सामाजिक-आर्थिक अधिकारों की रक्षा व प्रोत्साहन के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।
बीती बातें भूलकर नए अध्याय की हो शुरूआत
उप राज्यपाल ने कहा कि सहकारिता विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। इस क्षेत्र में जो आयाम हमें हासिल करना था वह हासिल नहीं कर पाए। जो बीत गया उसे भूलकर हमें आगे बढ़ना है। नए अध्याय की नई सोच के साथ शुरूआत करनी है। इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए। गांवों को सहकारिता के साथ जोड़ना है। न केवल जोड़ना है बल्कि सहकार से समृद्धि मंत्र के साथ आत्मसात करना है।
मिशन यूथ सहकारिता संगठन के रूप में कर रहा काम
उन्होंने कहा कि मिशन यूथ सहकारिता उद्यमिता संगठन के रूप में काम कर रहा है। वह यह बता रहा है कि व्यवसाय को कै से सहकारी भावना के साथ किया जाए ताकि आधुनिक चुनौतियों का सामना किया जा सके।