एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन में लाखों ट्यूलिप के फूल खिलने से पर्यटन क्षेत्र में रोशनी की एक किरण दिखने लगी है। इसे देखने के लिए काफी संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद बनी हुई है।
डल झील किनारे स्थित जबरवान पहाड़ियों के दामन में बसे एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन ने कश्मीर के जख्मों पर मरहम लगाने का काम शुरू कर दिया है।
इस बाग में पूरी तरह से खिल चुके ट्यूलिप के फूल देश विदेश के पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार बैठे हैं। बाग में लाखों रंगबिरंगे ट्यूलिप के फूल दिल मोह लेते हैं।
सोमवार से लोगों के लिए खोले जाने वाले इस बाग में शनिवार से ही पर्यटकों का तांता देखने को मिल रहा है, जिससे लगता है कि कश्मीर का पर्यटन एक बार फिर से पटरी पर लौटने में कामयाब रहेगा और घाटी पर्यटकों की आमद से गुलजार हो उठेगी।
'जो देखा बयान करना मुश्किल'
ट्यूलिप गार्डन में घूमने आए पर्यटक अनुभव गुप्ता के अनुसार उन्हें यहां आकर एक अलग ही एहसास हुआ। इन्हें देख काफी अच्छा लगा। एक और पर्यटक भारती के अनुसार, उन्होंने सुना था, लेकिन यहां आकर देखना काफी अच्छा लगा जो बयान करना काफी मुश्किल है।
बाग में खिले ट्यूलिप फूलों की जानकारी देते हुए डायरेक्टर फ्लोरीकल्चर सुनील मिस्री ने बताया कि पूरा साल विभाग इस बाग की देख रेख में जी जान लगा देता है ताकि दुनिया के कोने कोने से आने वाले पर्यटक इसका खूब लुत्फ उठा सके।
बाग में 10 लाख के करीब ट्यूलिप खिलें हैं जो पर्यटकों के लिए 30 दिनों तक आकर्षण का केंद्र बने रहेंगे। मिस्री ने बताया कि इस फूल का जीवनकाल केवल 15 दिनों का रहता है लेकिन वह इस प्रकार से उसे उगाते हैं कि 30 दिनों तक पर्यटक बाग में फूल खिले देखें।
उन्होंने बताया कि इस समय बाग में 53 विभिन किस्मों के ट्यूलिप हैं जो विशेष तौर से हॉलैंड से मंगवाए जाते हैं।
पर्यटकों को लुभाने को कॉन्क्लेव
वहीं, कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग ने भी कमर कस ली है।
इसको लेकर विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर तसादुक अहमद का कहना था कि विभाग कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने लिए विशेष तौर पर एक टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन कर रहा है जिसमें देश के बड़े ट्रैवल एजेंट, होटिलियर के अलावा कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग और राज्य के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद, जो पर्यटन मंत्री भी हैं, कॉन्क्लेव में भाग लेंगे।
इसके पीछे मुख्य मकसद है पर्यटन को फिर से पटरी पर लौटाना। गौरतलब है कि पिछले साल आई विनाशकारी बाढ़ और एक हफ्ते से पैदा हुई बाढ़ जैसी स्थिति से कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जम्मू कश्मीर राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी पर्यटन को माना जाता है। कोशिश की जा रही है कि इसे मजबूत किया जाए।