जम्मू। नेशनल कांफ्रेंस ने कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक घर वापसी और उनका पुनर्वास, तीस साल से विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडितों का राजनीतिक सशक्तीकरण और उनके मंदिर व श्राइन बिल पारित करने का समर्थन किया है। ये तीनों प्रस्ताव शनिवार को शेर-ए-कश्मीर भवन जम्मू में पार्टी प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुए अल्पसंख्यक सेल के एक दिवसीय सम्मेलन में पारित किए गए।
इन प्रस्तावों में पंडितों के मंदिरों और धार्मिक स्थलों के प्रबंधन के लिए एक विधेयक को पारित करने की भी मांग की गई। पार्टी नेता अनिल धर ने कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडित बीते 30 साल से सम्मानजनक वापसी और पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहा हैं। कहा कि हमारे पास रोडमैप है और इसे केंद्र के साथ साझा करने के लिए तैयार हैं। दावा किया कि नेकां ने अपनी स्थापना के बाद से राजनीतिक रूप से समुदाय को सही प्रतिनिधित्व दिया है। लेकिन विभिन्न परिस्थितियों के कारण विस्थापित हुए समुदाय को सशक्त बनाने के लिए राजनीतिक सशक्तीकरण की जरूरत है। अनिल धर ने मांग की कि समुदाय के मंदिरों और धर्मस्थलों के विधेयक को पारित करने के लिए सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला उनकी आवाज उठाएं। सेल के अध्यक्ष एमके योगी ने कहा कि यहां मौजूद महिलाओं और पंडितों की भीड़ उनको जवाब दे रही है तो कह रहे हैं कि समुदाय पार्टी के साथ नहीं है। सम्मेलन में हेलिकॉप्टर हादसे में शहीद हुए सीडीएस जनरल विपिन रावत सहित अन्य सुरक्षाबलों की शहादत पर शोक प्रकट किया।
-------
जब चीन से बातचीत तो पाकिस्तान से क्यों नहीं : फारूक
नेकां प्रमुख ने फिर अलापा पड़ोसी मुल्क का राग
- कहा- कश्मीर में पुलिसकर्मी सुरक्षित नहीं तो आम लोग कहां से होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नेकां प्रमुख एवं सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूदा परिस्थितियों में जब चीन से बात की जा सकती है तो पाकिस्तान से क्यों नहीं। जबकि चीन हमारे देश के अधिकार क्षेत्र में लगातार घुसपैठ कर रहा है। कहा कि भले ही आसमान और धरती मिल जाए, लेकिन जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान का कभी नहीं होगा।
कश्मीर में हो रही हत्याएं दुखद हैं। लेकिन जब पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं है, तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे हो सकती है। सरकार सुरक्षा के दावे कर रही है। डॉ. फारूक शनिवार को शेर-ए-कश्मीर भवन जम्मू में पार्टी के अल्पसंख्यक सेल के एक दिवसीय सम्मेलन में बोल रहे थे। फारूक ने भाजपा सरकार को आड़े हाथ लेते कहा कि कश्मीर में हालात सामान्य बताए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं है। भाजपा संसद में महिला अधिकार विधेयक पारित क्यों नहीं करती है, जबकि उसके पास 300 सदस्य हैं। असलियत में वे नहीं चाहते हैं कि महिलाएं उनसे आगे आएं।
----
हिंदू और मुसलमानों में नफरत
फैलाकर दुश्मन फायदा उठा रहे
नेकां प्रमुख ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं और मुसलमानों में नफरत फैलाकर दुश्मन फायदा उठा रहे हैं। केंद्र में रही सरकारों ने कश्मीरी पंडितों को सिर्फ अपने वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया है, वादे पूरे नहीं किए। मौजूदा सरकार भी कश्मीरी पंडितों को घर वापसी का सिर्फ सपना दिखा रही है। मौजूदा परिस्थितियों में पंडित यह तह नहीं कर पा रहे कि वे मुसलमानों के साथ घाटी में रहकर सुरक्षित रह पाएंगे या नहीं। पंडितों के प्रवास के लिए पूर्व राज्यपाल जगमोहन के दो माह में वापसी के वादे का जिक्र करते कहा कि केपी को कभी वापस नहीं लाया गया।
-----
नमाज के लिए सरकार उचित जगह प्रदान करे
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के गुड़गांव के मामले में खुले में नमाज पर पाबंदी के बयान पर डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें देखना चाहिए कि वहां हमेशा धार्मिक सहिष्णुता रही है। संविधान धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। यदि खुले में नहीं, तो ऐसी जगह प्रदान की जाए जहां वे नमाज अदा कर सकें। शायद कोई जगह न होने के कारण ऐसा हो रहा है।