अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। पड़ोसी मुल्क अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। तीन दशकों से अधिक समय से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। अब नार्को-टेररिज्म की मदद से प्रदेश पर दोहरा प्रहार करने की फिराक में हैं। इससे जहां युवाओं में नशे की लत लगाई जा रही है वहीं, इसकी बिक्री से आए पैसे को आतंकवाद को बढ़ावा देने में करने की साजिश रच रहा है। पंजाब के बाद अब उड़ता कश्मीर बनाने की फिराक में है। लेकिन अब इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नियंत्रण रेखा वाले क्षेत्रों में बॉर्डर पुलिस पोस्ट स्थापित करने की पहल की है।
पाकिस्तान से ड्रग्स की तस्करी और कश्मीर में मिलिटेंट गतिविधियों में नशे की बिक्री से हासिल किए गए पैसे के इस्तेमाल को रोकने के लिए कुपवाड़ा, बारामुला और बांदीपोरा के तीन सीमावर्ती जिलों में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के आसपास 26 बॉर्डर पुलिस पोस्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सूत्रों के अनुसार उत्तरी कश्मीर के तीन सीमावर्ती जिलों में एलओसी से सटे इलाकों में सेना, बीएसएफ और पुलिस द्वारा कड़ी निगरानी रखी जाती है। काउंटर-इंफिल्ट्रेशन ग्रिड काफी मजबूत है, जिस कारण कुछ वर्षों से घुसपैठ में काफी कमी आई है। लेकिन पाकिस्तान समय-समय पर सीमा पार से नशे की खेप इस ओर भेजने में कामयाब भी हुआ है, लेकिन इंटेलिजेंस एजेंसियों की सतर्कता के चलते उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया गया है। सूत्रों की मानें तो कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिले में एलओसी के करीब कुछ ऐसे इलाके भी हैं जो बेहद करीब है और वहां से कई बार तस्कर कामयाब भी होते हैं। लेकिन अब ऐसे सभी जगहों को चिह्नित किया गया है और कोशिश है कि इसपर पूरी तरह से नकेल कसी जा सके।
सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में काम करेंगी पोस्ट
यह बॉर्डर पुलिस पोस्ट्स गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद स्थापित की जा रही हैं और इनकी स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जमीनों का आवंटन किया जा चुका है और आगे की प्रक्रिया शुरू की गई है। एक बॉर्डर पुलिस पोस्ट पर 20 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी और इसका नेतृत्व एक सब इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी करेगा। पाकिस्तान से नशीले पदार्थों की तस्करी पर नजर रखने के अलावा इन बॉर्डर पुलिस पोस्ट्स का इस्तेमाल इन तीन जिलों के सीमावर्ती कस्बों तक पहुंच बनाने और नियंत्रण रेखा पर तैनात सेना व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर घुसपैठ से निपटने के लिए किया जाएगा।
हर पुलिस पोस्ट की स्थापना पर खर्च होंगे 84 लाख रुपये
प्रत्येक बॉर्डर पुलिस पोस्ट के लिए स्वीकृत निर्माण लागत 84 लाख रुपये है और प्रत्येक पोस्ट के लिए जमीन भी चिन्हित की गई है। मच्छिल, गुरेज, केरन, तंगधार, पुलिस डिवीजन हंदवाड़ा, उरी और उत्तरी कश्मीर के अन्य क्षेत्रों के ऊपरी इलाकों में यह चौकियां बनाई जा रही हैं।
नजर रखने के लिए ड्रोन का भी लिया जाएगा सहारा
हालांकि, नशीले पदार्थों के खतरे पर अंकुश लगाना मुश्किल है। लेकिन बॉर्डर पुलिस पोस्ट्स की स्थापना उसी प्रयास को रोकने का हिस्सा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार नार्को-टेरर एक चुनौती है, लेकिन इन चौकियों पर तैनात जवान ड्रोन के जरिये नकली नोटों की तस्करी और हथियार गिराने पर भी नजर रखेंगे।
पंजाब पुलिस की भी ली जा रही मदद : डीजीपी
डीजीपी दिलबाग सिंह ने पाकिस्तान प्रायोजित नार्को-टेररिज्म को सबसे बड़ी चुनौती करार दिया है। डीजीपी ने कहा था कि हथियार और आईईडी गिराने के लिए राष्ट्र विरोधी तत्वों और आतंकवादियों द्वारा ड्रोन का इस्तेमाल एक खतरा है और वे उनके मंसूबों को विफल करने के लिए जवाबी कदम उठा रहे हैं। यह आतंकी मॉड्यूल पूरे जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश के बाहर भी सक्रिय हैं। ऐसे मॉड्यूल्स को ध्वस्त करने के लिए पंजाब पुलिस की भी सहायता ली जा रही है।
पिछले साल बारामुला और कुपवाड़ा जिले
हुआ था नार्को-टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़
पाकिस्तान ने आतंक को जिंदा रखने के लिए ड्रग्स और हथियार भेजने की दोहरी रणनीति का इस्तेमाल किया है। बीते साल जून में पहले बारामुला जिले और फिर कुपवाड़ा में एक नार्को-टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ। इसके परिणामस्वरूप बारामुला में 10 लोगों और कुपवाड़ा में 17 लोगों को हथियारों, चार पिस्तौल के साथ व 45 करोड़ रुपये की हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था।