पीडीपी की अध्यक्षता महबूबा मुफ्ती
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गठबंधन टूटने के साथ ही सभी विपक्षी दल सक्रिय हो गए हैं। पीडीपी भाजपा गठबंधन के दौरान ही अपनी एक सीट खो बैठी है। लोगों में भाजपा के साथ गठबंधन करने का रोष है। पीडीपी को अपना वोट बैंक का आधार भी लगातार खो रही है। गठबंधन टूटने के साथ अब पीडीपी को लोगों को जवाब देना होगा कि क्यों हिंदूवादी पार्टी से गठबंधन किया।
सीपीआईऱ् (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद युसूफ तारीगामी के अनुसार पीडीपी गठबंधन बनाने के साथ ही अपना जनाधार खो चुकी थी। इसकी जीती जागती मिसाल है अप्रैल 2016 में श्रीनगर की सीट को खोना। इस सीट को नेकां ने दोबारा हथिया लिया और इस सीट पर फारूक अब्दुल्ला जीते। जिसके बाद अनंतनाग संसदीय सीट पर अब तक चुनाव नहीं हो पाए।
पनुन कश्मीर के चेयरमैन डा अजय चरंगु के अनुसार पीडीपी के खिलाफ जम्मू में पहले से ही रोष था। हालात बिगड़ रहे है। पीडीपी के अपने गढ़ उत्तरी कश्मीर में भी अपना आधार खो दिया है। इसी क्षेत्र में सबसे आतंकी वारदातें हुई हैं। एक हजार पत्थरबाजों को छोड़ने और 11 हजार युवाओं से केस वापस लेने का लाभ भी पीडीपी को नहीं होने वाला है।
रमजान के सीजफायर और उसके बाद हिंसक घटनाएं और पत्थरबाजी की घटनाओं से नागरिकों के मारे जाने का असर भी पीडीपी पर पड़ेगा। विपक्षी दल सक्रिय होंगे और पीडीपी पर भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर निशाना साधेंगे।