100 दिन पुरानी रियासत सरकार के सहयोगियों के बीच तमाम मुद्दों पर अंतर्विरोध के बाद अब केंद्र सरकार की ओर से बाढ़ पीड़ितों के लिए घोषित 2400 करोड़ के पुनर्निर्माण पैकेज पर भी विवाद उठ खड़ा हुआ है।
विपक्ष के साथ ही गठबंधन सरकार में सहयोगी पीडीपी भी इस मसले पर भड़क गई है। पीडीपी का आरोप है कि केंद्र कश्मीरियों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त है। पार्टी के नेतां का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो गठबंधन जारी रखने पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
पीडीपी के वरिष्ठ नेता तथा सांसद हमीद कर्रा ने केंद्र सरकार के पैकेज पर कहा कि गठबंधन का एजेंडा केवल कागजों में है। पहले ही दिन से गठबंधन सरकार की कार्यप्रणाली पर कोई आम सहमति नहीं है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार यदि इस प्रकार का रवैया जारी रखेगी जिससे कश्मीरियों तथा पार्टी को नुकसान पहुंचे तो भाजपा के साथ संबंध जारी रखने पर फिर से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से घोषित पैकेज कश्मीरियों के साथ क्रूर मजाक है।
केंद्र भेदभाव कर रहा है। उत्तराखंड तथा लेह में आई आपदा कश्मीर की आपदा की ही तरह थी। ज्ञात हो कि नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस एवं पैंथर्स पार्टी ने पैकेज पर पहले ही अंसतोष जताया था। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने तो यहां तक कहा कि खोदा पहाड़ निकला चूहा।