दिवाली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कश्मीर दौरे से ठीक पहले पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी होने से सीमावर्ती ग्रामीण एक बार फिर सहम गए हैं। इस हाल में ग्रामीण घरों में दीये जलाने से भी परहेज कर रहे हैं। सीमा से सटे गांवों में दहशत का आलम यह है कि दिवाली पर भी गलियों में चहल-पहल दिखाई नहीं दे रही है।
बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार अब तक शिविरों में रह रहे हैं। मंगा राम, कस्तूरी लाल, सरपंच चौधरी बचन लाल का कहना है कि दिवाली पर वह अपने घरों को रोशन कर पाएंगे भी या नहीं। वह घरों में ही दिवाली मनाना चाहते हैं, लेकिन पाकिस्तान गोलाबारी के बीच यह मुमकिन नहीं लगता। उनका कहना है कि जान जोखिम में डालकर दिवाली पर गांव में नहीं रहना चाहता।
प्रशासन भी अभी शिविरों में ही रहने के लिए कहा है। उधर, पाकिस्तानी सेना और रेंजर मस्जिदों में लगे लाउड स्पीकरों से सूचना देकर अपने क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाने के लिए कह रहे हैं। सुचेतगढ़ पंचायत के सरपंच सवर्ण लाल भगत, नई बस्ती गुलाबगढ़ के सरपंच चौधरी अर्जुन सिंह का कहना है कि पाकिस्तान पर भरोसा करना ठीक नहीं है। बेहतर होगा कि लोग शिविरों में ही दिवाली मनाएं।