विनाशकारी बाढ़ के बाद देशभर से कश्मीर आने वाली राहत सामग्री के वितरण पर लगातार हो रहे विवादों के बाद उमर सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।
प्रदेश सरकार ने नए निर्देश जारी करते हुए एनओसी की अनिवार्यता खत्म कर दी है साथ ही राहत सामग्री देने वालों को भी कई गैर जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने से राहत दी जाएगी।
हालांकि अब राहत सामग्री लाने वालों को एक सेल्फ सर्टिफिकेट देना होगा जिसमें राहत सामग्री की गुणवत्ता और अन्य जानकारी होगी। जिससे किसी तरह की चूक और गड़बड़ी न हो।
सामान लाने वालों से अभद्रता की थी शिकायतें
गौरतलब है कि देशभर के अन्य हिस्सों से आने वाली राहत सामग्री को लेकर पिछले कई दिनों में लगातार विवाद सामने आए थे। खासकर सड़क के रास्ते आने वाली राहत सामग्री को लखनपुर बार्डर पर ही रोक लिया जा रहा था।
जिसे पेचीदा औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही आगे आने दिया जा रहा था। कई बार इसको लेकर राहत सामग्री लाने वालों की पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से झड़प भी हो चुकी थी, वहीं तीन दिन पूर्व गुजरात से रेल द्वारा राहत का सामान लेकर जम्मू आए गुजरात के एक संगठन ने प्रशासन पर राहत सामग्री को जबरदस्ती हथियाने और कश्मीर भेजने का आरोप भी लगा दिया था।
इसको लेकर उक्त संगठन ने प्रेस कान्फ्रेंस भी की थी, जिसमें प्रशासन के अधिकारियों पर अभद्रता और हाथापाई करने के सनसनीखेज आरोप भी लगाए थे। इससे पूर्व राहत सामग्री लेकर आए दिल्ली के एक छात्र संगठन ने पुलिस अधिकारियों पर नाजायज रूप से परेशान करने का आरोप लगाया था।
लाने वाले को देना होगा सेल्फ सर्टिफिकेट
लगातार इस तरह की शिकायतें मुख्यमंत्री के पास पहुंच रही थी, जिसके बाद उमर ने खुद मामले में आगे आते हुए राहत सामग्री लाने वालों के लिए एनओसी की अनिवार्यता समाप्त करने के निर्देश जारी कर दिए।
गुरुवार को ट्वीट करते हुए उन्होंने इसकी जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने कुछ गैरजरूरी औपचारिकतों को समाप्त करने का निर्देश भी दिया है जिससे राहत सामग्री लाने वालों को आसानी रहे और वो अपनी मर्जी से उसका वितरण कर सकें।
हालांकि सामान लाने वाले को खुद का एक सेल्फ सर्टिफिकेट भी देना होगा, जिससे लाए गए सामान की विश्वसनीयता बनी रहे। यह सारी कवायद अन्य जगहों से राहत सामग्री लाने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए की गई है।