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अब निजी ट्रांसपोर्ट की तरह चलेगी एसआरटीसी

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राज्य परिवहन निगम अब निजी ट्रांसपोर्ट की तरह ही अपनी बसों का परिचालन करेगा, ताकि बसों में यात्रियों की कमी को दूर किया जा सके। निगम प्रबंधन सीजन देखकर किराए में बढ़ोतरी और कटौती करेगा, जैसे निजी ट्रांसपोर्टर करते हैं।
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दरअसल, निगम की बसों का एक तय किराया है, जबकि निजी ट्रांसपोर्टर किराए में कटौती और बढ़ोतरी कर लेते हैं। इसकी वजह से सरकारी बसों को छोड़ कर निजी बसों में यात्री चले जाते हैं। सरकारी बसों में यात्रियों की संख्या कम होने का यह एक बड़ा कारण है।

निगम के जनरल मैनेजर (ऑपरेशन) मुश्ताक अहमद का कहना है कि जहां से भी एसआरटीसी की बसें चलती हैं, वहां पर निजी बसों का वर्चस्व है। वह लोग अपनी बसों का किराया कम कर देते हैं। अब बस को तो तय समय पर निकलना है, इसलिए कम यात्रियों को लेकर भी निकलना पड़ता है।
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परिवहन विभाग की लापरवाही

निगम की इस हालत के लिए परिवहन विभाग और पुलिस भी जिम्मेदार है। जीएम मुश्ताक अहमद का कहना है कि एसआरटीसी की बसों के लिए कोई निर्धारित जगह नहीं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, कटड़ा पर हमारा कोई स्टैंड नहीं।

एसआरटीसी की बसों को जगह ही नहीं मिलती। निजी ट्रांसपोर्टर पुलिस के साथ मिलीभगत कर उनकी बसों को चलने ही नहीं देते। परिवहन आयुक्त और पुलिस प्रशासन को कई बार इसे लेकर शिकायत की गई। मंत्री और अधिकारी चाहते हैं कि यह मिलीभगत खत्म हो, लेकिन जमीनी स्तर पर यह सिस्टम लागू नहीं हो पा रहा।

जानकारी के अनुसार कटड़ा, रेलवे स्टेशन जम्मू, बस स्टैंड जम्मू से ही एसआरटीसी की बसें राज्य और बाहर चलती हैं। इस समय कटड़ा के लिए 40 बसें, इंटरस्टेट 20 बसें, राज्य के भीतर 25 बसें चलती हैं।

निगम की करीब 90 बसें हर रोज 50 फेरे लगा रही हैं। हर एक फेरे में निगम को 60-70 फीसदी यात्री ही लेकर चलना पड़ रहा है। निगम मुश्किल से वाहन का खर्च ही निकाल पा रहा है, जबकि वाहन खराब होने पर अतिरिक्त पैसा खर्च होता है।
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