जिले के कई स्कूलों को सर्व शिक्षा अभियान की ओर से लाखों रुपये के कंप्यूटर दिए गए थे। उम्मीद थी कि इससे सरकारी स्कूलों में जहां विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी, वहीं छात्रों को इसका लाभ मिलेगा, हालांकि ऐसा नहीं हो पाया।
लाखों रुपये खर्च करने बाद भी सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को इनका कोई लाभ नहीं मिल पाया है। शिक्षक की कमी के चलते कंप्यूटरों पर धूल जमा रही है।
जिला की पंचायत मदून के सरपंच दर्शन चौधरी ने बताया कि दो वर्ष पूर्व उनकी पंचायत के मिडिल स्कूल मदून में सर्व शिक्षा अभियान के अंतगर्त पांच कंप्यूटर एक जेनसेट और कंप्यूटर के लिए अलग से एक कमरा बनवाया गया था।
कमरे की सजावट के लिए पचास हजार रुपये भी खर्च किए गए थे, जबकि कुल खर्च लाखों में रहा। इसके बाद भी सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
उनके अनुसार कंप्यूटर कमरे में रखे-रखे धूल चाट रहे हैं। इसकी वजह कंप्यूटर सिखाने के लिए शिक्षक की कमी के साथ ही जेनसेट के लिए तेल की कमी भी है।
'जेडईओ को निर्देश दिए गए हैं कि जिन स्कूलों मे कंप्यूटर की सुविधा है, उन्हें चालू किया जाए और विद्यार्थियों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाए। इसके लिए स्कूलों का दौरा कर जानकारी जुटाई जाएगी तथा स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति का प्रयास किया जाएगा।' - मंगलदेव, मुख्य शिक्षा अधिकारी