रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते तापमान, सालाना लाखों टन तलछट के अनियंत्रित जमाव, अतिक्रमण और अपशिष्ट निर्वहन जैसे प्राकृतिक तथा मानव निर्मित दोनों कारणों से केंद्रशासित प्रदेश में वेटलैंड्स और जल निकायों में गिरावट आ रही है।
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने वेटलैंड्स और जल निकायों की बिगड़ती स्थिति पर जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति समेत अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। एनजीटी इसे लेकर एक समाचार रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते तापमान, सालाना लाखों टन तलछट के अनियंत्रित जमाव, अतिक्रमण और अपशिष्ट निर्वहन जैसे प्राकृतिक तथा मानव निर्मित दोनों कारणों से केंद्रशासित प्रदेश में वेटलैंड्स और जल निकायों में गिरावट आ रही है। इसमें डल, वुलर, अंचर और मानसबल झीलों और झेलम घाटी में हैगम राख, श्रीनगर के पास होकरसर और गांदरबल के मध्य जिले में शालबुग समेत वेटलैंड्स में प्रदूषण का भी दावा किया गया।
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि समाचार रिपोर्ट वेटलैंड्स और जल निकायों के प्रभावी प्रबंधन और उनकी स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए त्वरित और ठोस उपायों की आवश्यकता को दर्शाता है। इसने पर्यावरण मानदंडों के अनुपालन और वेटलैंड (संरक्षण और प्रबंधन) नियमों और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन से संबंधित एक पर्याप्त मुद्दा भी उठाया।
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पिछले सप्ताह पारित आदेश में एनजीटी ने कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया। इनमें जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, केंद्र शासित प्रदेश के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग के सचिव और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी शामिल हैं। पीठ ने इन सभी से 22 मई को होने वाली अगली सुनवाई से कम से कम एक हफ्ते पहले अपना जवाब देने को कहा है।