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कश्मीर: सात फरवरी तक छंट सकती है सियासी धुंध

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रियासत में तेजी से बदल रहे समीकरणों के बीच नेकां के ताजा कदम से सियासी भूचाल उठ खड़ा हुआ है। पीडीपी के तात्कालिक प्रतिक्रिया में समर्थन को महज ड्रामेबाजी बताए जाने से लगता नहीं है कि पीडीपी-नेकां के बीच दोस्ती परवान चढ़ेगी। इसके पीछे कई वजहें हैं।
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दोनों ही क्षेत्रीय पार्टी होने की वजह से घाटी में दोनों के लिए गठबंधन की स्थिति में अपना वजूद बनाए रखना चुनौती होगी। सबकी निगाहें अब पीडीपी-भाजपा के अगले कदम पर है। रोजाना बदल रहे समीकरणों से कयासबाजी तेज हो गई है।

इस बीच सियासी पंडितों का मानना है कि सरकार बनाने की दिशा में राज्यसभा चुनाव यानी सात फरवरी के पहले पीडीपी-भाजपा गठबंधन पर कोई महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।
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राज्यसभा में भाजपा की स्थिति कमजोर

सियासी पंडितों का कहना है कि दिल्ली चुनाव के लिए मतदान सात फरवरी को होना है। इसी दिन रियासत की राज्यसभा की चार सीटों के लिए भी वोट डाले जाएंगे। चूंकि, नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण नहीं हुआ है, लेकिन उन्हें राज्यसभा के लिए वोट डालने का अधिकार मिल गया है।

जानकार बताते हैं कि 87 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट के लिए 21 विधायकों का समर्थन होना चाहिए। इस आधार पर भाजपा तथा पीडीपी एक-एक सदस्यों को जिताने की स्थिति में हैं।

राज्यसभा में पहले से ही भाजपा कमजोर स्थिति में है। ऐसे में उसके लिए एक-एक सीट महत्वपूर्ण है। सियासत के  जानकारों की मानें तो राज्यसभा की सीट पर कब्जा करने के लिए भी दोनों दलों के बीच बातचीत होगी और फिर सात फरवरी तक दोनों दल गठबंधन के तौर पर सरकार बनाने का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं।
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संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई

पीडीपी के 28 और भाजपा के 25 सदस्य मिलकर आसानी से बहुमत का आंकड़ा प्राप्त कर लेंगे। सियासी पंडितों का मानना है कि चूंकि नेकां के साथ पहले भाजपा की बात चली थी।

लिहाजा अभी यह संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यह अलग बात है कि पार्टी फोरम पर उमर को साफ शब्दों में गठबंधन के लिए कोर कमेटी के विरोध का सामना करना पड़ा। उधर, सूत्रों का कहना है कि भाजपा दिल्ली चुनाव की वजह से पीडीपी से तालमेल बनाने में परहेज कर रही थी।

साथ ही ओबामा के दौरे के चलते प्रधानमंत्री मोदी के पास पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद से मिलने का पर्याप्त समय न हो पाना भी दोनों दलों के बीच औपचारिक बातचीत की राह में रोड़ा रहा।

सूत्र बताते हैं कि फरवरी के पहले सप्ताह में बातचीत आगे बढ़ सकती है और सात फरवरी तक यह गतिरोध खत्म हो सकता है।
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