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चैत्र नवरात्र के लिए सजने लगा मंदिरों का शहर, बाजार

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जम्मू। चैत्र नवरात्र दो अप्रैल से शुरू हो रहे हैं, जिसके लिए मंदिरों के शहर में तैयारियां तेज हो गई हैं। मंदिरों को भव्य रूप से सजाने और साफ-सफाई का काम जारी है। दो साल बाद बिना पाबंदियों के त्योहार को मनाने के लिए लोगों में काफी उत्साह है। नवरात्र में व्रत के सामान और मां की चुनरियों से दुकानें सज गई हैं। इसके साथ ही पर्व को उत्साहपूर्वक मनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। दो अप्रैल को सुबह 6:21 से 8:29 बजे तक साख लगाने का शुभ मुहूर्त है।
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चैत्र नवरात्र दो अप्रैल से 10 अप्रैल रविवार तक रहेंगे। नौ अप्रैल को श्री दुर्गाष्टमी और 10 अप्रैल श्री दुर्गा नवमी एवं श्री रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। अबकी बार नवरात्रि पूरे नौ दिन के हाेंगे। इस बार मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएगी। नवरात्र को लेकर मंदिरों के शहर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों से लेकर बाजार सजने लगे हैं। लोग पूजा और व्रत सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं। कारोबारियों को भी नवरात्र पर्व से काफी उम्मीदें हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस बार कलश, शहद, मिठाई की बिक्री काफी हो रही है। बाजारों में पूजा सामग्री की दुकानों में भीड़ जुट रही है। देवी-देवताओं की मूर्तियां बेचने वालों ने भी कई स्थानों पर स्टॉल लगाए हैं। परेड, पुरानी मंडी, चबूतरा चौक में खरीदारी के लिए लोग पहुंच रहे हैं।
इन दाम में मिल रही पूजा की सामग्री
धूप बत्ती 10 रुपये से शुरू, चुनरी 10 रुपये से शुरू, सुपारी चार रुपये से, खमनी डोरा 10 रुपये से, सिंदूर 15 रुपये से, पुष्पमाला 50 रुपये से, रूई 10 रुपये से, इलायची 10 रुपये पैकेट, देशी घी 350 रुपये से शुरू और माता की मूर्ति के दाम 50 रुपये से शुरू हैं।
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कब और कौन सा होगा नवरात्र
- 2 अप्रैल प्रतिपदा मां शैल पुत्री पूजा और घट स्थापना
- 3 अप्रैल द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी पूजा
- 4 अप्रैल तृतीया मां चंद्रघंटा पूजा
- 5 अप्रैल चतुर्थी मां कुष्मांडा पूजा
- 6 अप्रैल पंचमी मां स्कंदमाता पूजा
- 7 अप्रैल षष्ठी मां कात्यायनी पूजा
- 8 अप्रैल सप्तमी मां कालरात्रि पूजा
- 9 अप्रैल अष्टमी मां महागौरी
- 10 अप्रैल नवमी मां सिद्धिदात्री/श्रीरामनवमी एवं श्रीदुर्गा नवमी
इस बार घोड़े पर सवार होकर आएगी मां
महंत रोहित शास्त्री के अनुसार देवी भागवत में बताया गया है कि रविवार और सोमवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनिवार और मंगलवार को कलश स्थापना होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है। गुरुवार और शुक्रवार के दिन कलश स्थापना होने पर माता डोली पर चढ़कर आती हैं, जबकि बुधवार के दिन कलश स्थापना होने पर माता नाव पर सवार होकर आती हैं। इस बार चैत्र नवरात्र दो अप्रैल यानी शनिवार से शुरू हो रहे हैं। इसलिए मां दुर्गा इस बार घोड़े पर सवार होकर आएंगी। घोड़ा युद्ध का प्रतीक माना जाता है। घोड़े पर देवी दुर्गा का आगमन शासन और सत्ता के लिए अशुभ माना गया है।
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