जम्मू। स्वामी अमरनाथ छड़ी मुबारक यात्रा आखिरी पड़ाव की ओर बढ़ रही है। श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी पर रक्षाबंधन के दिन शुभ मुहूर्त में परंपरागत छड़ी पूजन के पश्चात सीमित संख्या में साधु संत पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन करेंगे। पहलगाम ट्रैक के क्लीयर न होने के कारण पवित्र गुफा तक छड़ी को चापर के माध्यम से लाया जाएगा। रक्षाबंधन पर छड़ी पहलगाम में रुकेगी और अगले दिन 23 अगस्त को पहलगाम स्थित लिद्दर नदी में छड़ी विसर्जन पूजा से इसका समापन होगा। इस साल लगातार कोविड महामारी के कारण लगातार दूसरी बार अमरनाथ यात्रा को रद्द किया गया है।
हर साल छड़ी मुबारक कश्मीर के ऐतिहासिक मंदिरों में रुक कर पारंपरिक पहलगाम ट्रैक से पवित्र गुफा तक पहुंचती रही है, लेकिन पिछले दो साल से यह संभव नहीं हो पाया है। जिससे परंपरा को जारी रखते हुए आखिर में चापर से छड़ी को सीमित साधुओं के साथ पवित्र गुफा तक ले जाया जाता है। छड़ी मुबारक के महंत दीपेंद्र गिरी ने बताया कि इस बार पहलगाम ट्रैक को क्लीयर नहीं किया गया था, जिससे रक्षाबंधन के दिन ही हवाई मार्ग से छड़ी को हिमलिंग के दर्शनों के लिए ले जाया जाएगा। छड़ी मुबारक अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार श्रीनगर सहित अन्य ऐतिहासिक मंदिरों तक पहुंची है। इसमें कुछ साधु नियमित रूप से छड़ी की पूजा अर्चना से जुड़े रहे हैं। इस साल सरकार ने अमरनाथ यात्रा में 6 लाख यात्रियों के आने की उम्मीद लगाई थी। इसके लिए बुनियादी ढांचे सहित तीर्थ यात्रियों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जा रही थीं, लेकिन कोविड महामारी के कारण यात्रा लगातार प्रभावित हुई है। गत एक अप्रैल को यात्री अग्रिम पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें 23 अप्रैल तक 33 हजार यात्रियों ने पंजीकरण करवा लिया था। इसके अलावा ऑनलाइन यात्री पंजीकरण भी जारी था, लेकिन कोविड महामारी के कारण पंजीकरण प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया गया। पंजीकृत हुए यात्रियों ने मांग की थी कि उन्हें किसी तरह से पंजीकरण शुल्क के एवज में कोई सुविधा दी जाए। इस साल यात्रियों और सेवा प्रदाताओं के लिए दुर्घटना बीमा कवर 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया गया था। इसी तरह पोनी के लिए 30 हजार से बढ़ाकर यह बीमा कवर 50 हजार किया गया था।