महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आखिरकार किसी ने ऐसी फिल्म का नाम लिया जो सत्ताधारी पार्टी की ओर से मुस्लिमों, खासकर कश्मीरियों को नीचा दिखाने और पंडितों और मुसलमानों के बीच खाई को चौड़ा करने के प्रचारित प्रोपेगेंडा के अलावा कुछ नहीं है। दुख की बात ये है कि सत्य को दबाने के लिए डिप्लोमैटिक चैनलों का इस्तेमाल हो रहा है।
विवेक अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर IFFI के जूरी हेड नदव लापिड के बयान पर मचे घसामान में अब जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की भी एंट्री हो गई है। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने इजराइली फिल्म निर्माता नदव लापिड के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म मुसलमानों, विशेषकर कश्मीरियों को विलेन दिखाने के लिए सरकार की ओर से प्रोपेगेंडा है।
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महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आखिरकार किसी ने ऐसी फिल्म का नाम लिया जो सत्ताधारी पार्टी की ओर से मुस्लिमों, खासकर कश्मीरियों को नीचा दिखाने और पंडितों और मुसलमानों के बीच खाई को चौड़ा करने के प्रचारित प्रोपेगेंडा के अलावा कुछ नहीं है। दुख की बात ये है कि सत्य को दबाने के लिए डिप्लोमैटिक चैनलों का इस्तेमाल हो रहा है।
इजरायल के फिल्म मेकर नदव लैपिड की महबूबा मुफ्ती ने तारीफ की है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि आखिरकार एक व्यक्ति ऐसा निकला जिसने द कश्मीर फाइल्स पर सत्ताधारी पार्टी के प्रोपगैंडा का सच उजागर कर दिया है। महबूबा ने द कश्मीर फाइल्स पर नदव लैपिड के बयान की सराहना करते हुए कहा कि यह दुखद है सच्चाई का मुंह बंद करने के लिए कूटनीतिक चैनल का इस्तेमाल किया गया।
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बता दें कि इजरायली फिल्ममेकर नदव लैपिड ने बतौर ज्यूरी मेंबर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल गोवा में निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स को वल्गर और प्रोपगैंडा कहा था। इस फिल्म में 90 के दशक में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को पनपते दिखाया गया है। इसमें कश्मीरी पंडितों की पीड़ा को शिद्दत से दर्शाया गया है।
वहीं मामले को लेकर इज़राइल के महावाणिज्यदूत कोब्बी शोशानी ने आईएफएफआई के जूरी प्रमुख नदव लापिड की विवादास्पद टिप्पणी को एक बड़ी गलती बताया और कहा कि इज़राइली फिल्म निर्माता द्वारा की गई टिप्पणियां फिल्म पर देश की स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं।