जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
- फोटो : PTI
कश्मीर में उपद्रवियों से सख्ती से निपटने की मजबूरी पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती परेशान हैं। देश की स्वतंत्रता के 70 साल में पहली बार ईद पर कर्फ्यू लगाने की विवशता ने महबूबा को आहत किया है।
उन्होंने अपने करीबियों से कहा कि हालात ने इस कदर मजबूर कर दिया है कि निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए नहीं चाहते हुए भी कुछ बेहद कठोर कदम उठाने पड़े। उन्होंने केंद्र सरकार से अब भी वार्ता से हल निकालने की कोशिश को प्राथमिकता देने को कहा है।
एक सप्ताह पहले तक अलगाववादियों पर जमकर बरस रहीं मुख्यमंत्री महबूबा इन दिनों मुखर नहीं हैं। पीडीपी सूत्रों के मुताबिक महबूबा ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत कर दक्षिण कश्मीर में सेना और सुरक्षा बलों के के चार हजार अतिरिक्त जवान उतारने के निर्णय पर फिर से विचार करने की अपील की है।
गृह मंत्री ने सुरक्षा बलों को एक सप्ताह में कश्मीर में स्थिति सामान्य करने के निर्देश दिए हैं। पीडीपी नेताओं को आशंका है कि इस क्रम में उपद्रवियों की मौत के आंकड़े बहुत बढ़ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक इस स्थिति ने महबूबा को परेशान किया है।
पीडीपी को अपने गढ़ मेंं ही जनाधार खोने का ड़र
लोगों को संबोधित करतीं महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
जम्मू में पिछले दिनों कालेज की छात्राओं को स्कूटी वितरित करने के क्रम में ही उन्हें सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अनंतनाग में एक युवक की मौत की जानकारी मिली थी। तब उन्होंने कार्यक्रम में ही अपने दुख का इजहार किया था।
अनंतनाग महबूबा मुफ्ती का गृह जिला है और दक्षिण कश्मीर उनकी पार्टी पीडीपी का सबसे बड़े जनाधार वाला इलाका है। वर्तमान में सबसे अधिक उपद्रव इसी क्षेत्र में हो रहे हैं, लिहाजा उन्हें पार्टी के जनाधार की भी चिंता सताने लगी है।
ईद-उल-फितर पर 7 जुलाई को महबूबा ने महिला होने के बावजूद हजरतबल में नमाज अता की थी। फिर 8 जुलाई को आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर घाटी हिंसा की आग में दहक उठी। नतीजतन इस बार ईद-उल अजहा पर हजरतबल और जामिया मस्जिद में नमाज अता करने की इजाजत नहीं दी गई।
सुरक्षाबलों को मिले थे हिंसा होने की आशंका के इनपुट
Indian Army
- फोटो : File Photo
दरअसल सुरक्षा बलों को ईद-उल-अजहा की नमाज के बाद व्यापक हिंसा के इनपुट मिले थे। अलगाववादियों ने संयुक्त राष्ट्र के श्रीनगर कार्यालय तक मार्च का एलान किया था। इस वजह से पूरे कश्मीर में कर्फ्यू लगा दिया गया।
पीडीपी प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा है कि कश्मीरी बच्चों के भविष्य के मद्देनजर अलगाववादियों को अड़ियल रुख छोड़कर वार्ता करनी चाहिए।