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नई सरकार के गठन पर भाजपा-पीडीपी में मंथन शुरु

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नई सरकार के गठन के लिए भाजपा और पीडीपी में मैराथन मंथन जारी है। पीडीपी नेताओं की भाजपा आलाकमान से अनौपचारिक बातचीत चल रही है और दूसरी ओर पीडीपी दल के अंदर भी सहमति से न्यूनतम साझा कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में जुटी है। इस बीच पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की राज्यपाल से 31 दिसंबर को मुलाकात तय हुई है।
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भाजपा के रियासत अध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा नए साल में पहली जनवरी को गवर्नर से मिलेंगे। गवर्नर ने दोनों दलों के अध्यक्षों को एक जनवरी से पहले सरकार गठन पर विचार विमर्श के लिए बुलाया है। इसी मुलाकात में दोनों दलों की ओर से सरकार के गठन का प्लान भी राज्यपाल को सौंपा जाना है।

भाजपा और पीडीपी दोनों एक-दूसरे के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती हैं, लेकिन सीएम पद पर पेच अब भी फंसा है।  लिहाजा परस्पर सियासी दबाव की कोशिश भी चल रही है। इसी रणनीति के तहत भाजपा ने नेशनल कांफ्रेंस से बातचीत का मोर्चा फिर खोल दिया है।
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लंदन में फोन पर फारूक से भाजपा नेताओं की बात

सूत्रों की मानें तो भाजपा महासचिव राम माधव की सोमवार को फोन पर फारूक अब्दुल्ला से बातचीत हुई है। फारूक आपरेशन के बाद लंदन में हैं और उनके पुत्र उमर अब्दुल्ला भी उनके पास ही हैं। रविवार को जब पीडीपी और भाजपा के बीच सहमति की चर्चा ने जोर पकड़ा, तब उमर ने लंदन से ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तंज कसा।

उमर ने जम्मू कश्मीर से वंशवाद खत्म करने के मोदी के ऐलान की याद उन्हें दिलाई। सोमवार को भाजपा और नेकां में एक बार फिर संपर्क जुड़ने के बाद फारूक और उमर ने गठबंधन पर बातचीत के मुद्दे पर अपने दल के नेताओं पर बयान देने की बंदिश लगी दी।

अब उमर, फारूक या फिर अधिकृत प्रवक्ता ही गठबंधन पर सार्वजनिक बयान दे सकेंगे। पीडीपी और कांग्रेस ने अपने दलों में ऐसी बंदिश पहले ही लगा रखी है। पीडीपी की ओर से नईम अख्तर और कांग्रेस की ओर से अंबिका सोनी, गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज ही इस बारे में बयान के लिए अधिकृत हैं। जाहिर है सियासी दलों ने नपी-तुली भाषा के इस्तेमाल का निर्णय लिया है ताकि खेल बिगड़ नहीं जाए।
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मुफ्ती मोहम्मद के लिए भी फैसला लेना एक चुनौती

पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद ने सोमवार को विधायकों और कुछ बुद्धिजीवियों से भावी गठबंधन पर बातचीत की। प्रवक्ता नईम अख्तर ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि जिस तरह का जनादेश मिला है, उसमें मुफ्ती मोहम्मद के लिए भी फैसला लेना एक चुनौती है। इसलिए वह कोई जल्दीबाजी नहीं करना चाहते।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और नेकां के साथ महा गठबंधन का विकल्प भी है और भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने पर भी विचार चल रहा है। व्यापक विमर्श के बाद भाजपा या कांग्रेस से टेबल पर बातचीत होगी। उधर, भाजपा अब भी मुख्यमंत्री पद पर समझौता नहीं करना चाहती।

पार्टी के रियासत अध्यक्ष जुगल किशोर कहा कि मुख्यमंत्री भाजपा का ही होगा। भाजपा नेता अपनी योजना के साथ एक जनवरी को राज्यपाल से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा के बगैर कोई सरकार संभव नहीं है।
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