श्री माता वैष्णो देवी भवन के गेट नंबर 3 के पास भगदड़ हादसे पर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने सफाई देते हुए कहा कि तीर्थ यात्रियों के दो समूहों में हाथापाई के कारण भगदड़ मची थी। इसमें 12 तीर्थ यात्रियों की जान चली गई और 16 अन्य घायल हुए हैं। मरने वालों में 10 पुरुष और 2 महिला यात्री हैं। यह घटना 1 जनवरी की मध्यरात्रि 2.15 बजे घटी।
बोर्ड के अनुसार राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने प्रतिदिन यात्रा की सामान्य क्षमता को 50 हजार तक सीमित कर दिया है। प्रासंगिक रूप से कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए 35 हजार तीर्थ यात्रियों को 31 दिसंबर 2021 और 1 जनवरी 2022 को यात्रा के लिए आगे बढ़ने की अनुमति दी गई थी। बोर्ड के चेयरमैन व उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को तड़के 3 बजे पूरी स्थिति के बारे में जानकारी दी गई थी। भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारवालों को दस लाख रुपये और घायलों को दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।
भगदड़ के समय मौके पर मौजूद लोगों ने श्री माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग के इंतजामों और भवन के पास भीड़ नियंत्रण के लिए व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। भगदड़ में बाल-बाल बचे एक व्यक्ति ने कहा कि वे दस लोगों के साथ यात्रा के लिए आए थे। रात को ऐसे ही हालत भगदड़ से पहले भी बने थे, लेकिन ऐन मौके पर स्थिति संभाल ली गई। दूसरी बार भीड़ ऐसी बेकाबू हुई कि उसे संभालना किसी के बस में नहीं रहा। एक श्रद्धालु ने कहा कि वह पहले भी यात्रा कर चुके हैं लेकिन इतनी भीड़ इससे पहले कभी नहीं देखी।
चेता रही थी पुलिस, यहीं रुक जाओ, मच सकती है भगदड़
ग्वालियर के प्रेम सिंह ने कहा कि यात्रा मार्ग पर कोविड गाइडलाइन का कहीं पालन नजर नहीं आया। बिना मास्क के पहुंचे हजारों लोग भवन के पास इस कदर उमड़े कि पुलिस ने भी हाथ खड़े कर दिए। पुलिस कर्मी लोगों से कह रहे थे, आगे मत बढ़ो, यहीं रुक जाओ। भदगड़ मच सकती है।