आने वाली एक अगस्त से शुरू हो रही मचैल यात्रा (किश्तवाड़) की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के पक्का डंगा स्थित महालक्ष्मी मंदिर सहित अन्य चंडी मां के मंदिरों में साफ-सफाई का काम शुरू हो गया है।
बता दें कि अमरनाथ यात्रा को छोड़ दिया जाए तो यह जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी यात्रा होती है जिसमें करीब तीन लाख लोग भाग लेते हैं।
मां के दरबार के लिए जम्मू से आगामी 17 अगस्त को माता रानी की अखंड ज्योत रवाना होगी, जो 18 अगस्त को भद्रवाह चिनौत मंदिर से छड़ी मुबारक के साथ आगे जाएगी।
एक महीने तक चलेगी यात्रा
इस यात्रा के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। यात्रा एक माह तक जारी रहेगी। इसमें मां के भक्तों की सुविधा के लिए किश्तवाड़ के गुलाबगढ़ क्षेत्र से दरबार तक हेलीकाप्टर सुविधा भी रहेगी।
जम्मू से 17 अगस्त को अखंड ज्योत के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं के जाने की उम्मीद है। इसमें अगले दिन भद्रवाह चिनौत मंदिर से छड़ी मुबारक के साथ भक्तजन आगे बढ़ेंगे और किश्तवाड़ में रात को रुकेंगे।
इसके बाद 19 अगस्त को किश्तवाड़ से चलकर छड़ी मुबारक गुलाबगढ़ अठोली में रात को रुकेगी।
मचैल माता के मंदिर में रुकेगी छड़ी मुबारक
20 अगस्त को करीब दस किलोमीटर का सफर तय करके छड़ी मुबारक मसू क्षेत्र में रात को रुकेगी।
इसके अगले दिन चशोती से 12 किलोमीटर का सफर तय करके छड़ी मुबारक 22 अगस्त को माता रानी के दरबार में दोपहर को पहुंचेगी। इसके अगले दिन भी छड़ी मुबारक मचैल माता के मंदिर में रुकेगी और 24 को वापसी करेगी।
इस दौरान मंदिर परिसर में भजन कीर्तन के अलावा हवन यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इसमें सुख समृद्धि के लिए हजारों श्रद्धालु आहुतियां डालेंगे। जम्मू में अखंड ज्योति की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसमें संभाग भर से श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
गुलाबगढ़ से तीस किलोमीटर दूर है मंदिर
किश्तवाड़ के गुलाबगढ़ क्षेत्र से मां का दरबार करीब तीस किलोमीटर दूरी पर स्थित है, जिसमें श्रद्धालु पैदल मार्ग से ही वहां पहुंचते हैं।
यात्रा रूट पर कई जगह स्थानीय लोग मचैल माता के भक्तों की सेवा के लिए जुटे रहते हैं।
इसके लिए विभिन्न जगहों पर श्रद्धालुओं के ठहरने के साथ लंगरों की व्यवस्था की जाती है।