रबी की फसलों की सिंचाई के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाए किसानों का बारिश का इंतजार और लंबा खिंचने वाला है। मौसम विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिले में पंद्रह दिसंबर तक बारिश के आसार नहीं के बराबर हैं। इससे 46 हजार हेक्टेयर पर मुख्य रूप से होने वाली गेहूं की खेती दाव पर लग चुकी है।
पहाड़ी इलाकों का हाल और भी बुरा है। जिले की पांच हजार हेक्टेयर पहाड़ी भूमि पर होने वाली खेती इस सीजन में नुकसान की आशंका है। इसके साथ किसानों की आखिरी उम्मीद ने भी साथ नहीं दिया। पहाड़ी इलाकों में मौसम कोहरे और बर्फबारी का है।
फसल की हर हाल में संभावना न के बराबर हो चुकी है। जिले का पच्चीस हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि का हिस्सा सीधे तौर पर बारिश के रहमोकरम पर निर्भर करता है, जबकि हीरानगर और कठुआ की लगभग बीस हजार पांच सौ पंद्रह हेक्टेयर भूमि पर किसानों के पास सिंचाई के लिए विकल्प उपलब्ध हैं। लेकिन, कुल फसल से देखा जाए, तो साठ से सत्तर फीसदी कृषि योग्य भूमि इस बार प्रभावित हुई है।