नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने कश्मीर घाटी में अपने पहले उम्मीदवार की सोमवार को घोषणा कर दी। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर की पांच सीटों में से सबसे हॉट अनंतनाग-राजोरी सीट से मौजूदा सांसद हसनैन मसूदी का टिकट काट कर गुज्जर-पहाड़ी नेता मियां अल्ताफ को मैदान में उतारा है।
66 वर्षीय नेता पांच बार विधायक और फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला सरकार में पूर्व मंत्री रहे हैं। मसूदी अनंतनाग सीट से सांसद हैं। जो परिसीमन के बाद अनंतनाग-राजोरी सीट हो गई है।
नेकां मुख्यालय में पार्टी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मियां अल्ताफ समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी में नाम की घोषणा करते हुए कहा, मियां अल्ताफ से बेहतर उम्मीदवार इस सीट के लिए कोई दूसरा नहीं हो सकता उन्होंने कभी मजहब, जात, बिरादरी के आधार पर वोट नहीं मांगे।
मालूम हो कि परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई अनंतनाग-राजोरी संसदीय सीट में परिसीमन के बाद राजोरी और पुंछ को शामिल किया गया। इस सीट पर तीसरे चरण में सात मई को मतदान होना है। इसकी अधिसूचना 12 अप्रैल को जारी होगी और नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 19 अप्रैल होगी।
इंडिया गठबंधन के हिस्से के रूप में नेकां ने कश्मीर घाटी में तीन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की पहले ही घोषणा कर रखी है। गठबंधन में इनके सहयोगी पीडीपी की भी कश्मीर की तीन लोकसभा सीटों में से दो पर अपने उम्मीदवार उतारने की संभावना है, लेकिन पार्टी ने अभी तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की है। भाजपा ने भी अभी तक यहां से उम्मीदवार नहीं उतारा है।
1987 से लगातार जीता है गांदरबल से विस चुनाव
मियां अल्ताफ 1987 से लगातार मंत्री और मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के कंगन से विधायक रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर पहला चुनाव लड़ा था। बाद में वह नेकां में शामिल हो गए। इनके पिता गुरु मियां बशीर अहमद और दादा मियां निजामुद्दीन भी विधायक और मंत्री रहे थे।
परिवार ने 1962 के बाद से अब तक कंगन से 10 विधानसभा चुनाव जीते हैं। सबसे पहले मियां निजामुद्दीन ने 1962 का विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद बेटे मियां बशीर अहमद ने चार विस चुनाव जीते।
बाद में मियां अल्ताफ अहमद ने 1987, 1996, 2002, 2008 और 2014 में जीत प्राप्त की। उनके परदादा बाबा जी साहिब लारवी, उनके दादा मियां निज़ाम उद दीन लारवी और उनके पिता मियां बशीर अहमद लारवी भी कश्मीर में धार्मिक व्यक्ति थे। उनके पिता ने 2017 में उन्हें ''वली-ए-अहेद'' घोषित किया था।
1995 में हुआ था आतंकी हमला
मियां अल्ताफ पर 1995 में आतंकियों ने हमला किया था। हरकत-उल-अंसार (अब जैश-ए-मोहम्मद) के आतंकियों ने एक आईईडी धमाका कर गोलीबारी की थी। घटना के बाद, उन्हें उपचार के लिए हवाई जहाज़ से दिल्ली ले जाया गया और वापस लौटने पर, वह अपने पैतृक गांव में ही रहे।
इस बार हॉट सीट रेहगी अनंतनाग-राजोरी सीट
परिसीमन के बाद पुरानी अनंतनाग सीट अब राजोरी-पुंछ क्षेत्र को मिलाकर अनंतनाग-राजोरी सीट बन चुकी है। पांचों सीटों में यह लोकसभा सीट सबसे हॉट मानी जा रही है। परिसीमन से पहले मुस्लिम बहुल इस सीट पर कांग्रेस हैट्रिक लगा चुकी है। नेकां व पीडीपी भी यहां से कई बार जीत का स्वाद चख चुकी है।
कभी अनंतनाग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र जम्मू और कश्मीर के पांच लोकसभा क्षेत्रों में से एक था। मई 2022 में इसका नाम बदलकर अनंतनाग-राजोरी निर्वाचन क्षेत्र कर दिया गया। अगर अनंतनाग सीट की बात करें तो यह हाई प्रोफाइल सीट रही है। यहां से महबूबा मुफ्ती 2014 में सांसद बनीं लेकिन 4 जुलाई 2016 को उनके इस्तीफे से यह सीट खाली हो गई। इस्तीफे के करीब तीन साल तक यहां उपचुनाव नहीं हो पाया।
इस सीट पर चरमपंथ का प्रभाव होने का तर्क देकर चुनाव आयोग ने चुनाव नहीं करवाए। अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद महबूबा ने अनंतनाग विधानसभा सीट से चुनाव जीता। बाद में 2019 में इस सीट पर चुनाव हुआ और नेशनल कांफ्रेंस के हसनैन मसूदी ने जीत हासिल की। उन्होंने 40180 वोट हासिल किए थे जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के गुलाम अहमद मीर ने 33504 वोट हासिल किए। पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती तीसरे नंबर पर रहीं। 2019 में इस सीट पर कुल 9 प्रतिशत ही मतदान हुआ था। यहां पढ़ें पूरी खबर...