जम्मू-कश्मीर में मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर ही सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं। प्रदेश में पहले वाला भर्ती माफिया बौखलाहट में है लेकिन अब ऐसे माफियाओं की नहीं चलेगी। देश के कानून के तहत जम्मू-कश्मीर में भर्तियां की जा रही हैं।
अमृतपाल के मामले में जम्मू कश्मीर से जुड़े तार के सवाल पर उपराज्यपाल ने कहा कि हमारे सुरक्षाबल स्थिति पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं। हम आश्वस्त करते हैं कि पंजाब की घटनाओं का असर जम्मू-कश्मीर में नहीं होगा। सीमावर्ती गांवों में सीमा पुलिस पोस्ट बनाने का उद्देश्य विकास के साथ सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
एलजी ने कहा-संपत्ति कर के बेहतर कार्यान्वयन के लिए लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। एक समिति इस पर काम कर रही है। हम संपत्ति कर पर पहले ही सारी बातें स्पष्ट कर चुके हैं। देश में सबसे बाद में जम्मू-कश्मीर में संपत्ति कर लगाया जा रहा है। दूसरे राज्यों की तुलना में बहुत कम कर लगाया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने कहा कि वर्ष 2018-19 से पहले बिना किसी उचित प्रणाली के सरकारी ठेके दे दिए जाते थे। इनमें अधिकांश में निविदा प्रक्रिया को नहीं अपनाया जाता था और फिर ये नियमों के तहत जांच में फंस जाते थे। लेकिन अब निविदाओं में प्रशासनिक मंजूरी, ई निविदा आदि का पालन किया जा रहा है।
इनमें जो ठेकेदार नियमों का उल्लंघन करेंगे उन्हें भुगतान में मुश्किलें आएंगी। सरकार किसी भी गलत काम का भुगतान नहीं करेगी। पहले यूटिलाइजेशन प्रमाणपत्र दे दिए जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हमारी नजर में नियमों के तहत सभी बिलों का भुगतान कर दिया गया है। ऐसे किसी ठेकेदार का भुगतान लंबित नहीं है।
मुख्य सचिव डॉ. अरुण मेहता ने कहा कि जम्मू -कश्मीर में करीब ढाई लाख लोगों ने विभिन्न सरकारी विभागों में गलत तरीके से नौकरियां हासिल की हैं। वर्ष 1994 के बाद विभिन्न एसआरओ (स्टेटचुरी रूल्स आर्डर ) के तहत लोगों को लगाया गया। एसआरओ 64 के तहत हजारों लोगों को लगा दिया गया।
करीब 60 हजार को नियमित भी कर दिया गया। इसी तरह विभिन्न विभागों में एक लाख से अधिक दिहाड़ीदार लगा दिए गए, जो आज तक स्थायी नहीं हो पाए। एसआरओ 520 के तहत भी ऐसा किया गया जो भारतीय संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है।