जम्मू में सदी की सबसे बड़ी त्रासदी में नदियों के सैलाब ने जहां कहर ढाया, वहीं पहाड़ी इलाकों में पहाड़ों ने सितम ढाया। मैदानी इलाकों में अगर बाढ़ ने कहर ढाया है तो पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन ने सोते हुए लोगों को जमींदोज कर दिया।
भूस्खलन से कई गांव मुख्य शहरों से कट गए हैं। पहाड़ियों को काटकर बनाए गए रास्ते कहीं दिखाई नहीं पड़ते। मिटटी के कच्चे घर टूट गए हैं। पस्सियां गिरने से मवेशी दब गए। लोगों की जान बची है लेकिन घरों में खाने के लिए कुछ नहीं बचा है।
दूरदराज क्षेत्रों में हालात अभी भी बदतर बने हैं। राजोरी के पहाड़ी गांव सोंगड़ी, पतरेडू में रहने वाले लोग पूरी तरह से सेना द्वारा पहुंचाई जाने वाली राहत सामग्री पर आश्रित हो गए हैं।