लद्दाख प्रशासन ने आयोजन की पूरी तैयारी कर ली है। देश-विदेश से चुने गए पेवेशवर धावक लुकुंग से होकर मान तक दौड़ पूरी करेंगे। इसमें चार विदेशी, 21 लद्दाखी और अन्य राज्यों के 50 धावक पर्यावरण संरक्षण का संदेश देंगे।
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन सीमा पर पैंगोंग झील की बर्फ बनी सतह पर 20 फरवरी को 75 धावक मैराथन से विश्व रिकॉर्ड बनाएंगे। चुने गए 75 धावकों में चार विदेशी, 21 लद्दाख से और 50 धावक देश के अन्य राज्यों से हैं। दुनिया में सबसे ऊंचाई पर (13,862 फुट) स्थित झील की जम चुकी सतह धावकों का ट्रैक होगी।
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कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड के बीच मैराथन पूरी करने वाले धावकों का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज होगा। जलवायु परिवर्तन के बीच पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए मैराथन को द लास्ट रन नाम दिया गया है।
एडवेंचर स्पोर्ट्स फाउंडेशन ऑफ लद्दाख, स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह और पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से आयोजन कर रहा है। इसे लेकर सेना और आईटीबीपी ने अपनी कार्ययोजना तैयार कर ली है।
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जिला उपायुक्त लेह श्रीकांत बालासाहेब सुसे ने बताया कि यह आयोजन कार्बन न्यूट्रल लद्दाख का संदेश देने के लिए किया जा रहा है। सभी हितधारकों से सहयोग लिया जा रहा है। सेना और आईटीबीपी की ओर से जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
विंटर टूरिज्म को पंख लगाएगी मैराथन
पैंगोंग झील पर द लास्ट रन मैराथन से विंटर टूरिज्म को पंख लगेंगे। जिला उपायुक्त लेह के अनुसार भारत-चीन सीमा पर 700 वर्ग किलोमीटर तक फैली पैंगोंग झील पर तापमान माइनस 30 डिग्री तक पहुंच जाता है। इससे झील पूरी तरह से जम जाती है।
इस पर मैराथन से पर्यटन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, अत्यधिक सर्दी के सीजन में जंस्कार नदी पर चादर ट्रैक आयोजित किया जाता है, जहां साहसिक पर्यटन में दिलचस्पी रखने वाले सैलानी उत्सुकता से पहुंचते हैं। यहां बर्फानी तेंदुए भी आकर्षण का केंद्र बनते हैं।