पुलवामा के नदीमार्ग में 24 कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में शामिल पाकिस्तानी दहशतगर्द जिया मुस्तफा की मौत को कश्मीरी पंडितों ने ईश्वरीय न्याय बताया है। 2003 में जिया मुस्तफा को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। रविवार को पुंछ के मेंढर के भाटादूड़ियां जंगल में सुरक्षाबलों ने जिया मुस्तफा को मार गिराया है।
पनुन कश्मीर के चेयरमैन अजय चरंगु ने कहा कि जिया मुस्तफा की मौत पीड़ितों के लिए एक ईश्वरीय न्याय के रूप में देखते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस मामले का मास्टरमाइंड होने के बावजूद, वह एक विचाराधीन कैदी था। यह कानून प्रणाली की खामियों को उजागर करता है। आतंकवादी कृत्यों में शामिल दोषियों को तत्काल सजा देने के लिए न्याय प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।
ऑल स्टेट कश्मीरी पंडित कांफ्रेंस (एएसकेपीसी) के पूर्व महासचिव टीके भट ने कहा कि जिया मुस्तफा की मौत ईश्वरीय न्याय है, क्योंकि सरकार हमें न्याय देने में विफल रही थी। जिया मुस्तफा रावलकोट का रहने वाला था, जो लश्कर का एक प्रशिक्षित कमांडर था। 2007 में इसे जम्मू के कोट भलवाल जेल में भेजा गया था।
शाह के दौरे से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए बनेगा माहौल: चुरंगू
भाजपा के राजनीतिक फीडबैक विभाग के प्रभारी एवं कश्मीरी पंडित नेता अश्विनी कुमार चुंरगू ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री के प्रदेश के दौरे से घाटी में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए माहौल बनेगा। कश्मीर में पिछले कुछ अरसे से अल्पसंख्यकों की टारगेट किलिंग से हालात चुनौतीपूर्ण होते जा हैं।
ऐसे समय में गृहमंत्री के प्रदेश के दौरे और हालात की समीक्षा करने से उम्मीद बंधी है कि अल्पसंख्यक की सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनेगी। चुरंगू ने अमित शाह के जम्मू-कश्मीर के दौरे की प्रासंगिकता विषय पर वेबिनार में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा गृहमंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद प्रदेश का पहला दौरा किया है। ऐसे में अल्पसंख्यकों में विश्वास की भावना पैदा हो पाएगी। ब्यूरो