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घाटी नहीं लौटना चाहते हैं कश्मीरी पंडित

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साइबर सिटी में रह रहे कश्मीरी पंडित अब वापसी को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जो लोग घर वापसी की बात कर रहे हैं, उसे वहां के वास्तविक हालात की जानकारी नहीं है।
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आज केंद्र में भाजपा सरकार है और जम्मू-कश्मीर में उसकी समर्थित सरकार है। कल को स्थिति ऐसी नहीं रही तो फिर वही समस्या पैदा हो जाएगी। इसी वजह से पंडितों को पलायन करना पड़ा था।

कश्मीरी पंडितों की घर वापसी को लेकर देश में कई प्रकार की बातें सुनने को मिल रही हैं। कोई वहां स्मार्ट सिटी तो कोई अलग टाउनशिप की बात कर रहा है।

यही नहीं ऐसे भी मत आ रहे हैं कि पंडित वापस आकर सभी के साथ रहे, इससे सामाजिक समरसता और धर्म निरपेक्षता की भावना पनपेगी।
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अल्पसंख्यक हिंदुओं को अलग जगह दें

अकेले गुड़गांव के न्यू पालम विहार में कश्मीरी पंडितों के 300 परिवार हैं। वहीं पूरे गुड़गांव में ऐसे परिवारों की संख्या करीब पांच सौ के आसपास हैं। इनमें से कोई भी जम्मू-कश्मीर वापस नहीं लौटना चाहता है।

शहर के आर्बिट हास्पिटल के संचालक डॉ. अनीश धर का कहना है कि उन्हें वर्ष 1989 का वह मंजर आज भी याद है जब अपना बसा-बसाया घर छोड़ शरणार्थी बनने को मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि वहां वापस जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता है। आज भाजपा सरकार है, कल नहीं रहेगी तो उनकी सुरक्षा कौन करेगा? उन्होंने कहा कि आतंकवाद की मौजूदगी से भी डर है। इस कारण कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं।

न्यू पालम विहार निवासी व पेशे से वकील डॉ. बीएम राजदान ने कहा कि पंडित कश्मीर तभी जा सकते हैं, जब कश्मीर के दो भाग किए जाएं। एक भाग वहां के मुस्लिमों का हो और दूसरा भाग अल्पसंख्यक हिंदुओं के रहने के लिए हो।

कश्मीरी पंडित बीएल भट्ट और एसके बली का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से पलायन कर न्यू पालम विहार में बसे लोगाें को सरकार और प्रशासन सुविधा दे नहीं पा रहा। अब कश्मीर लौटकर उनकी सुरक्षा की क्या गारंटी है।
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