भारत-पाक विदेश स्तर की प्रस्तावित वार्ता को रद्द किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले से कश्मीर में निराशा का आलम है। सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस और मुख्य विपक्षी दल पीडीपी ने इसे केंद्र का अफसोसजनक कदम करार दिया।
पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इसके लिए कांग्रेस के रवैये को जिम्मेदार ठहराया। नेकां के महासचिव और ग्रामीण विकास मंत्री अली मोहम्मद सागर ने कहा कि यह अफसोसजनक है।
अलगववादियों का कहना है कि क्या ऐसे ही मोदी पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के मिशन को आगे बढ़ाएंगे।
'पहले भी पाकिस्तानी नेताओं से मिलते रहे अलगाववादी'
ग्रामीण विकास मंत्री अली मोहम्मद सागर ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने कश्मीरी अलगाववादियों की मुलाकात को आधार बनाकर प्रस्तावित बातचीत को रद्द किया है तो मैं यही कहूंगा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। हुर्रियत नेता कोई पहली बार ऐसा नहीं कर रहे हैं।
वह पहले भी पाकिस्तानी नेताओं से मिलते रहे हैं। एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कश्मीर मिशन को ही आगे बढ़ाएंगे और दूसरी तरफ वह विदेश सचिव स्तर की वार्ता को रद्द कर रहे हैं।
पीडीपी की अध्यक्ष एवं सांसद महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वार्ता रद्द होने से भारत-पाक संबंधों पर बुरा असर होगा। केंद्र सरकार को बातचीत रद्द नहीं करनी चाहिए।
'प्रधानमंत्री को वार्ता रद्द नहीं करनी चाहिए थी'
महबूबा मुफ्ती ने कांग्रेस को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कांग्रेस ने मोदी द्वारा पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंध बनाने के शुरू किए गए प्रयासों को ठेस पहुंचाई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रो सैफुद्दीन सोज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रस्तावित विदेश सचिव वार्ता रद्द नहीं करनी चाहिए थी।
उन्होंने सफाई दी कि कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने तो सिर्फ हुर्रियत नेताओं की पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित के साथ मुलाकात पर सवाल उठाया था।
'कश्मीर मुद्दे पर भारत ने नहीं बदला अपना स्टैंड'
आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी ने कहा कि इससे एक बात फिर साबित हो गई है कि कश्मीर मुद्दे पर भारत ने अपना स्टैंड नहीं बदला है। हमारी पाकिस्तानी उच्चायुक्त से मुलाकात तो सामान्य ही है।
उदारवादी हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज मौलवी उमर फारुक ने कहा कि केंद्र सरकार को पता होना चाहिए कि कश्मीर समस्या के हल के लिए कश्मीरियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पाकिस्तानी उच्चायुक्त और नेताओं से तो हम पहले भी मिलते रहे हैं और आगे भी मिलते रहेंगे।