कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन को मारने और खदेड़ने का सिलसिला पूरा हो चुका था, लेकिन अग्रिम चौकियों पर एहतियाती इंतजाम और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सामरिक तैयारी को बड़े पैमाने पर अंजाम दिया गया।
अचानक सामने खड़ी हुई युद्ध की चुनौती ने शुरुआती चरण में तो हैरत में डाला था। भारतीय सेना जब संभली तो दुश्मन के होश फाख्ता हो गए थे। आपरेशन विजय के तहत त्वरित रूप से की गई जवाबी कार्रवाई तेरह जुलाई को भी जारी रखी गई।
एलओसी के इस पार भारतीय क्षेत्र की अग्रिम चौकियों तक 5 हजार टन गोला बारूद पहुंचाने का असंभव सा काम संभव कर दिखाया गया। यह सिलसिला 13 जुलाई को तेजी के साथ आगे बढ़ा।