जांच समिति का किया गया था गठन
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसके लिए जांच समिति गठित की। समिति ने प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी है। समिति के हाथ गड़बड़ी के कुछ सबूत लगे हैं। बताते हैं कि जांच समिति ने पहले सौ स्थान पाने वाले अभ्यर्थियों में 50-60 को पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन इनमें से ज्यादातर अभ्यर्थी समिति की ओर से पूछे गए सवालों का सही जवाब नहीं दे पाए। पूरी धांधली में अर्धसैनिक बलों से जुड़े एक रिटायर्ड अफसर, एक नेता की सुरक्षा में लगे कर्मी का नाम सामने आया है, जो इन दिनों भूमिगत हैं। भर्ती परीक्षा कराने वाली एजेंसी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।
सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि जांच समिति ने विभिन्न पहलुओं पर जांच की है। भर्ती परीक्षा का रिकॉर्ड खंगालने के साथ ही परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों को भी बुलाकर गहन पूछताछ की है। एक ही परिवार के दो या दो से अधिक लोगों के चयनित होने के मामले में भी समिति ने पूछताछ की है।