जम्मू विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर के फंदा लगाने के अगले दिन वीरवार को परिसर में सन्नाटा और खौफ का माहौल रहा। विश्वविद्यालय के सभी विभागों में ताला लटका रहा। विभागीय शिक्षक से लेकर कर्मचारी तथा जिम्मेदार पदों पर बैठे अध्यापक बोलने से बचते रहे। परिसर में कुछ छात्र मिले लेकिन वे भी इस पर कुछ बोलने से कतराते रहे और बात शुरू करते ही भाग खड़े हुए। इस बीच जिस कमरे में प्रो. चंद्रशेखर ने खुदकुशी की थी, उसे पुलिस ने सील कर दिया है।
विश्वविद्यालय में वीरवार को शैक्षिक गतिविधियां ठप रहीं। कुछ को छोड़कर लगभग सभी विभागों में ताला लटका हुआ था। पूरे विश्वविद्यालय परिसर में सन्नाटे के बीच कुछ छात्र नजर आए। उनसे जब घटना के बाबत करने की कोशिश की गई तो कुछ ने ऐसी किसी जानकारी से इनकार किया। कुछ ने बोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद आपस में बात करते हुए वे भाग निकले।
इस पूरे मामले में मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. आरती बख्शी तथा यौन उत्पीड़न समिति (कैश) की अध्यक्ष प्रो. अल्का शर्मा से भी फोन पर बात करने की कोशिश की गई। कैश की अध्यक्ष को एसएमएस कर मामले की जानकारी चाही। लेकिन दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया। दरअसल विभागाध्यक्ष से डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता की ओर से लगाए गए आरोपों- विभाग के लोग उन्हें परेशान कर रहे थे, पहले भी उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी थी के बाबत जानकारी चाही थी।
कैश की अध्यक्ष से यह जानने की कोशिश की गई थी कि विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न के कितने मामले अब तक सामने आए हैं और जांच के बाद उनका निष्कर्ष क्या रहा। कितनों के खिलाफ कार्रवाई हुई आदि। अगर विभागाध्यक्ष और कैश कमेटी की अध्यक्ष से इस संबंध में जानकारी मिलती है, तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय में दी गई श्रद्धांजलि
विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रोफेसर प्रकाश अंथाल ने कहा कि डॉ. चंद्रशेखर के निधन से पूरा विश्वविद्यालय परिवार शोकाकुल है। वीरवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियां बंद कर दी गईं। विश्वविद्यालय परिवार शोक की इस घड़ी में डॉ. चंद्रशेखर के परिवार के साथ है।