सुंजवां आतंकी हमले में सेना ने आतंकियों के खात्मे के लिए धरती से लेकर आसमान तक उन्हें मार गिराने की तैयारी पूरी कर ली थी। आतंकियों के कैंप के भीतर दाखिल होते ही सेना के तीन हेलीकाप्टर लगातार कैंप के ऊपर मंडरा रहे थे। आतंकियों की निगरानी के लिए सेना ने ड्रोन का भी इस्तेमाल किया था।
सेना ने अपने स्पेशल पैरा कमांडों को मोर्चा संभालने के लिए कैंप के भीतर तैनात कर दिया था। बताया जा रहा है पैरा कमांडों ने इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई और तीन फिदायीन हमलावरों को मार गिराया। कैंप के भीतर आतंकी जिस क्वार्टरों में मौजूद थे सेना ने उसके बाहर तीन टैंकों की तैनाती कर दी थी।
सूत्रों के मुताबिक सेना ने पहले रणनीति बनाई थी कि कैंप में फंसे जवानों के परिजनों को बचा कर निस्तनाबूत कर दिया जाए। लेकिन जब ये रणनीति सफल न हो पाई तो सेना ने झट से प्लान में बदलाव कर स्नाइपर से लैस जवानों को आतंकियों को मौत के घाट उतारने के लिए तैनात कर दिए। इस ऑपरेशन में वायुसेना के घातक कमांडो गरूड़ की भी मदद ली गई।
30 घंटे तक उड़ता रहा हेलीकाप्टर
कैंप की निगरानी में भारतीय सेना के तीन हेलीकाप्टर लगातार मंडरा रहे थे। इसके अलावा सेना का एक हेलीकाप्टर पूरे शहर का लगभग 30 घंटे तक चक्कर लगाता रहा। इस दौरान हर संदिग्ध हरकत पर नजर रखी जा रही थी। पूरी रात ड्रोन की मदद से भी शहर में होने वाली हरकतों पर नजर जमाई गई थी।
देर रात हुआ तेज धमाका
कैंप के भीतर रात के करीब 9 बजे तेज आवाज के साथ धमाका हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि आस-पास का पूरा इलाका थर्रा गया। माना जा रहा है कि सुरक्षाबलों टैंक की मदद से आतंकियों के छिपे होने जगह की पूरे क्वार्टरों को उड़ा दिया है।