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Omar Abdullah: उमर ने भाजपा को उसी के गढ़ में घेरा, पहाड़ी-गुज्जर समुदाय को साधा; खत्म कर दी ये गुंजाइश

Thu, 17 Oct 2024 01:23 PM IST
शाहरुख खान डॉ. बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू

सार

उमर अब्दुल्ला ने ने भाजपा को उसी के गढ़ में घेरा है। उमर ने पहाड़ी-गुज्जर समुदाय को साध लिया। बेहतरीन रणनीति से जम्मू की अनदेखी की आशंकाओं को सिरे से खारिज करने की कोशिश है।
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Omar Abdullah - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नई सरकार के शपथ ग्रहण में उमर अब्दुल्ला ने अपनी बेहतरीन रणनीति से जम्मू में भाजपा को उसके ही गढ़ में घेरने की कोशिश की है। इसके साथ ही पहाड़ी व गुज्जर समुदाय को साधकर भी इस वोट बैंक में सेंधमारी की गुंजाइश को खत्म कर दिया है। 
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अपनी रणनीति से जम्मू की अनदेखी की आशंकाओं को भी सिरे से खारिज करने का प्रयास किया है। जम्मू संभाग में नेकां व कांग्रेस को बहुत अधिक सफलता न मिलने के बाद भी जिस तरह से उमर ने मंत्रिमंडल में जम्मू को प्रतिनिधित्व देकर यह जताने की कोशिश की है कि जम्मू संभाग की कतई अनदेखी नहीं होगी। 

जम्मू संभाग के लोगों की भी सरकार होगी। यह अलग बात है कि जम्मू संभाग के दस में सात जिलों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है। राजोरी-पुंछ जिले की आठ में सात सीटों पर जीतने वाले उमर सरकार के समर्थन में हैं, जिनमें से दो उप मुख्यमंत्री के रूप में सुरिंदर चौधरी (पहाड़ी) व जावेद राणा (गुज्जर) को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिला है। 
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जम्मू के छंब इलाके से कांग्रेस के प्रत्याशी व पूर्व उप मुख्यमंत्री ताराचंद तथा भाजपा प्रत्याशी व पूर्व विधायक राजीव शर्मा को शिकस्त देने वाले निर्दल प्रत्याशी सतीश शर्मा को मौका दिया गया है। सतीश कांग्रेस के स्वर्गीय सांसद मदन लाल शर्मा के पुत्र हैं। 

राजोरी, पुंछ व जम्मू को प्रतिनिधित्व मिला, जबकि कठुआ, सांबा, उधमपुर, रियासी, रामबन, डोडा व किश्तवाड़ को मौका नहीं मिल सका है। हालांकि, लोग यह अनुमान लगा रहे थे कि सरकार गठन में यदि नेकां जम्मू की अनदेखी के आरोपों को खारिज करने की कोशिश करती है तो पीर पंजाल, चिनाब वैली के साथ ही जम्मू को भी प्रतिनिधित्व का मौका मिलेगा, लेकिन चिनाब वैली से किसी को भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जा सका। 

 

चिनाब वैली में नेकां के पास रामबन की सीट है और इंद्रवल से जीतने वाले निर्दलीय प्यारेलाल का भी समर्थन है। प्यारेलाल पहले भी नेकां में ही रहे थे, लेकिन टिकट बंटवारे में कांग्रेस के खाते में सीट जाने की वजह से वह निर्दल मैदान में उतर आए थे।

पूरी तरह से जम्मू के साथ सत्ता संतुलन नहीं
राजनीतिक विश्लेषक और जम्मू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हरि ओम का कहना है कि सरकार के पास कांटों का ताज है। यह पहला चुनाव रहा कि जम्मू और कश्मीर संभाग में ध्रुवीकरण हुआ। जम्मू संभाग के तीन विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह जरूर मिली लेकिन पूरी तरह से जम्मू के साथ सत्ता संतुलन नहीं है। कांग्रेस का मंत्रिमंडल में शामिल न होना भी सरकार पर असर डालेगी। असली तस्वीर तो सरकार के चार-पांच महीने बीतने के बाद सामने आएगी।

 

रैना को हराने वाले को डिप्टी सीएम बनाकर बड़ा संदेश
उमर ने भाजपा को घेरने के एक भी मौके नहीं जाने दिए। मंत्रिमंडल गठन में इसकी झलक साफ दिखी। भाजपा अध्यक्ष रविंद्र रैना को हराने वाले सुरिंदर चौधरी को डिप्टी सीएम बनाकर उन्हें इसका इनाम दिया। उन्होंने बड़ा संदेश देने की कोशिश की कि जिसके नेतृत्व में भाजपा ने पूरे प्रदेश में चुनाव लड़ा उसे हराने वाले को इनाम देकर नौशेरा क्षेत्र ही नहीं बल्कि राजोरी जिले के साथ भी न्याय किया गया है।

डल किनारे से इंडिया गठबंधन की एकता का संदेश
लोकसभा चुनाव में मजबूत विपक्ष के रूप में उभरने के चार महीने बाद एक बार फिर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले सीएम उमर अब्दुल्ला के शपथ ग्रहण समारोह के जरिये श्रीनगर से इंडिया गठबंधन ने पूरे दमखम के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने की कोशिश की। गठबंधन की मजबूती दिखाने के लिए कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, सीपीआई (एम), आप व डीएमके के दिग्गज शपथ समारोह के साक्षी बने। 

 

यह अलग बात है कि गैर भाजपा नेतृत्व वाली किसी भी राज्य का कोई मुख्यमंत्री नहीं शामिल हुआ। यहां नेकां नेताओं के अलावा लाल टोपी में सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी नजर आ रहे थे तो धोती कुर्ता में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी विराजमान रहे। 

 
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इसके अलावा लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी व कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, आप के संजय सिंह, सीपीआई (एम) के प्रकाश करात, सीपीआई के डी राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी, एनसीपी की प्रिया सुले ने भी शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचकर उमर सरकार का न केवल हौसला बढ़ाया बल्कि गठबंधन की एकता दिखाने की कोशिश की।


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