संवाद ही एकमात्र रास्ता, जिसने फिर अर्श पर पहुंचाया
वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 और 35 (ए) हटाया गया, तो उमर अब्दुल्ला ने राज्य में अलग-अलग जगहों पर जाना, लोगों से मिलना जारी रखा। केंद्र सरकार के खिलाफ जनता में स्पष्ट संदेश दिया। इसी बीच अलगाववादी नेताओं के खिलाफ भी मोर्चा खोला। लोगों को यह समझाने में कामयाब हुए कि इनके चुनाव जीतने से कश्मीरियों के मसले हल नहीं होंगे। लोकसभा 2024 के चुनाव में बारामुला की 18 विधानसभा में 15 सीटों पर इंजीनियर रशीद को लीड दिलाने वाली जनता ने उस लोकसभा क्षेत्र की16 सीटें नेकां की झोली में डालीं। राजनीतिक विशेषज्ञ मोहम्मद ताजुद्दीन कहते हैं कि उमर अब्दुल्ला लोकसभा में हारने के बाद भी कश्मीरी मुद्दों को पकड़े रहे। जमीनी स्तर पर काम करते रहे और जनता से सीधा संवाद बनाए रखने का ही नतीजा था कि वह दोबारा सत्ता में काबिज हो सके।
ये होंगी चुनौतियां... एलजी से न हो टकराव, पैदा हों रोजगार
उमर अब्दुल्ला के दूसरे मुख्यमंत्री काल में जम्मू-कश्मीर का सांविधानिक ढांचा पूरी तरह से बदल चुका है। इसमें राज्य के फैसले मुख्यमंत्री कार्यालय के अलावा राजभवन से भी होंगे। ऐसे में उमर अब्दुल्ला के सामने ये बड़ी चुनौती होगी कि वह एलजी से समन्वय बनाकर रखें। राज्य का विकास भी चलता रहे और रोजगार भी मिले, ये भी चुनौती रहेगा। एक नौकरशाह बताते हैं कि अब पुलिस में सीधी भर्तियां जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग करेगा। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर सिलेक्शन बोर्ड के पास सभी पीएसयू, सरकारी कंपनियों, निगमों और बोर्ड में सर्विसेस और नॉन-गजेटेड पदों के साथ-साथ क्लास-4 की भर्तियां करने का अधिकार भी होगा। यह साफ है कि अब चुनी हुई सरकार क्लास-4 श्रेणी में भी भर्ती नहीं कर सकेगी। अब असल परीक्षा उमर अब्दुल्ला की इसलिए भी होगी क्योंकि राज्य का दर्जा बहाल करवाने से लेकर किए वादों का पूरा करने का दबाव रहेगा।
वर्ष 2014 के चुनाव के बाद ऐसी थी राज्य की राजनीतिक तस्वीर
- 87 में पीडीपी ने 28 सीटें हासिल की। भाजपा 25, नेकां ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें पाईं
- भाजपा-पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई और मुफ्ती मोहम्मद सईद सीएम बने। जनवरी 2016 में मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन हो गया। बाद में उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं।
- महबूबा के सीएम बनने के करीब दो साल बाद 19 जून 2018 को गठबंधन टूट गया।
- इसके बाद राज्यपाल और फिर एलजी शासन लागू हो गया। सितंबर 2024 में 10 साल बाद फिर चुनाव हुए।