कोरोना से पहले एक करोड़ था टर्नओवर
अब 30 लाख मुश्किल से कमा पा रहे
मंजूर अहमद अलाई ने बताया कि कोरोना से बहुत नुकसान हुआ है। पहले हमारा टर्नओवर एक करोड़ था, जो अब घटकर 30 लाख तक पहुंच गया है। 70 फीसदी घाटा हो रहा है। महामारी से पहले हमारे पास 150 श्रमिक थे और आज 30 फीसदी ही हैं। अलाई ने कहा कि यह हाल केवल उनका ही नहीं, बल्कि पुलवामा में चल रहे सभी 17 पेंसिल स्लैट बनाने वाले कारखानों का है। अलाई ने बताया कि अप्सरा, नटराज, डोम्स जैसी बड़ी कंपनियों को यहीं से कच्चा माल जाता है, जो टॉप माना जाता है। फिर ये कंपनियां पेंसिल बनाकर 83 देशों में निर्यात करती हैं।
40 फीसदी श्रमिक घर लौट चुके
पुलवामा के कारखानों में 40 फीसदी प्रदेश के अन्य जिलों और बाहरी राज्यों के श्रमिक काम करते थे, जिनमें अधिकतर अपने घरों को लौट गए हैं। काम प्रभावित होने से स्थानीय श्रमिकों में से भी आधे से कम हो गए हैं। इन कारखानों में 20 फीसदी महिलाएं काम करती हैं, यहां कई पढ़े-लिखे युवा अपना रोजगार चला रहे हैं, जिन्हें यह डर सता रहा है कि कहीं उनका रोजगार न छिन जाए। सभी दोबारा स्कूल खुलने की दुआ कर रहे हैं। कारखाने में काम करने वाली फायेका ने बताया कि पहले यहां काफी लड़कियां काम करती थीं, लेकिन काम प्रभावित होने से कइयों को रोजगार खोना पड़ा। श्रमिक मुदस्सिर अहमद ने बताया कि पहले जो प्रोडक्शन 300 बैग से ऊपर हो रहा था अब केवल 100 तक आ पहुंचा है। लेबर की बात करें तो 200-250 श्रमिकों की जगह अब यहां 50-60 ही काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री भी हैं इस गांव के मुरीद
बता दें कि इस ‘पेंसिल वाला गांव’ ने प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित किया है। बीते साल मन की बात कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि यह जिला इस बात का उदाहरण है कि आयात पर देश की निर्भरता को कैसे कम किया जाए। मोदी ने कहा था कि एक समय में हम विदेशों से पेंसिल के लिए लकड़ी आयात करते थे, लेकिन अब हमारा पुलवामा देश को पेंसिल बनाने के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रहा है। मोदी की इस बात से कारोबारियों का काफी हौसला बढ़ा। गृह मंत्रालय की हालिया एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस गांव को प्रोडक्शन के लिए एक विशेष क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया कि अब पूरे देश को तैयार पेंसिल की सप्लाई की जाएगी, जो पूरी तरह से पुलवामा में निर्मित होगी, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण काम प्रभावित हो गया है। अब इस गांव और यहां के लोगों को बाजार के फिर से शुरू होने का बेसब्री से इंतजार है।