कुलदीप की मां के आंखों में बह रहे खुशी के आंसू
कुलदीप से मिलने की आस में मां की आंखें भी बीते 29 साल में पत्थर हो चुकी हैं। इन आंखों से अब खुशी के आंसू बह रहे हैं। कुलदीप सिंह की मां कृष्णा देवी का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि उनकी सांसों की डोर छूटने से पहले वो अपने बेटे से जरूर मिल पाएंगी।
मां ने बताया कि उनका बेटा बहुत दिलेर है। वो पाकिस्तान कैसे पहुंच गया, यह तो उन्हें नहीं पता लेकिन उन्हें यह जरूर उम्मीद थी कि एक दिन उनका बेटा सकुशल लौट आएगा। तीन दशक बाद ही सही भगवान ने उनकी प्रार्थना को सुन लिया है।
परिवार के नजदीकी लोगों ने बताया कि वाघा बॉर्डर से भारत पहुंचे कुलदीप को अमृतसर में जांच के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंप दिया गया है। प्रोटोकॉल के अनुसार ही उसे जेआईसी जम्मू ले जाया जाएगा जिसके बाद उसे कठुआ पुलिस और फिर परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
वतन वापसी पर जावेद से फिर कुलदीप हुआ नाम
पाकिस्तान से अपने परिवार के नाम लिखी चिट्ठी में कुलदीप सिंह ने अपने नाम के साथ एक नाम और इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान में कैद के दौरान कुलदीप सिंह का नाम जावेद भाई बन गया था। 29 वर्ष तक कुलदीप की यही पहचान पाकिस्तान में रही, लेकिन अब वतन वापसी के साथ ही जावेद भाई की जगह कठुआ के बेटे को उसका असली नाम वापस मिल गया है।
तीन दिन से घर आने का इंतजार, बुधवार शाम तक भी जम्मू-कश्मीर से लेने नहीं पहुंची टीम, परिवार निराश
सोमवार को पाकिस्तान से वाघा बार्डर के रास्ते कुलदीप सिंह भारत में तो दाखिल हो गए लेकिन घर तक पहुंचने का उनका सफर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। रेड क्रॉस अमृतसर में कुलदीप सिंह का बेटा बुधवार को भी उन्हें घर वापस लाने के लिए दिन भर इंतजार करता रहा।
उन्हें बस इतनी ही जानकारी दी गई कि जम्मू-कश्मीर से टीम लेने आएगी जिसके साथ ही उन्हें भेजा जाएगा। कुलदीप सिंह के बेटे मनमोहन सिंह ने बताया कि देर शाम तक वे जम्मू-कश्मीर पुलिस टीम के पहुंचने का इंतजार करते रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल रही है। यह इंतजार आखिर कब खत्म होगा।