जम्मू-कश्मीर के राजस्व रिकॉर्ड में गैर मुमकिन श्रेणी में दर्ज जमीन के मालिकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। जो भूमि वास्तविक रूप से दरिया, नाले या फिर खड्ड का हिस्सा नहीं है, लेकिन रिकॉर्ड में उसे गैर मुमकिन दरिया, नाला या खड्ड दर्शाया गया है, उसे वास्तविक स्थिति के अनुरूप ही रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। प्रशासनिक परिषद ने इसके लिए जिला, मंडल और प्रदेश की त्रिस्तरीय कमेटी को मंजूरी दे दी है। वर्ष 2010 के राजस्व रिकॉर्ड को आधार बनाकर जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में अगले तीन माह में निशानदेही और भूमि के नक्शे तैयार करने के काम को अंजाम दिया जाएगा।
गैर मुमकिन भूमि मामले में निशानदेही और नक्शे बनाने की प्रक्रिया को मंजूरी
प्रदेश के अन्य जिलों में एक वर्ष के दौरान इस कार्य को पूरा किया जाएगा। इससे एक तरफ भूमि मालिकों को जमीन के स्वतंत्र इस्तेमाल की अनुमति मिल जाएगी, वहीं गैर मुमकिन क्षेत्र में हुए अवैध कब्जों को भी हटाया जाएगा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में प्रशासनिक परिषद की बैठक में गैर मुमकिन भूमि मामले में निशानदेही और नक्शे बनाने की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई।
जीपीएस के प्रयोग से डिजिटल नक्शे, जलप्रवाह क्षेत्र की चौड़ाई
वास्तविक स्थिति को रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए खसरा आधार पर जीपीएस के प्रयोग से डिजिटल नक्शे, जलप्रवाह क्षेत्र की चौड़ाई और इसके आसपास की मालिकाना भूमि का विस्तार देखा जागा। चिह्नित जलप्रवाह क्षेत्र में यदि कोई अवैध कब्जा है तो उसे हटाने के लिए प्रक्रिया चलाई जाएगी। बैठक में सलाहकार फारूक खान, राजीव राय भटनागर, मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता और उपराज्यपाल के प्रधान सचिव नितेश्वर कुमार भी मौजूद रहे।
जिला समिति का जिम्मा
जिला उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति गैर मुमकिन खड्ड, दरिया और नाले की खसरा आधारित सर्वे करवाएगी। बाकायदा नक्शे बनाए जाएंगे। निशानदेही के साथ वर्ष 2010 के रिकॉर्ड और मिसल हकीकत के आधार पर जमीनी स्थिति को चित्रित किया जाएगा। कहीं पर अवैध कब्जे मिलते हैं तो उन्हें हटाने की सिफारिश की जाएगी।
मंडल स्तर की समिति
एक से ज्यादा जिलों के बीच किसी तरह के विवाद को लेकर या अंतर जिला परामर्श व अन्य मुद्दों को लेकर समन्वय स्थापित करने के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली मंडल स्तर की समिति काम करेगी। वहीं मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली प्रदेश स्तरीय समिति इन मामलों की निगरानी और समीक्षा करेगी।
भूमि मालिकों को ऐसे होगा लाभ
इस समय राजस्व रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है। जल प्रवाह क्षेत्र से बाहर होने के बावजूद कई भूमि मालिकों के नाम दर्ज भूमि को रिकॉर्ड में गैर मुमकिन खड्ड, दरिया या फिर नाला दर्शाया गया है। जबकि हकीकत में वह भूमि जलप्रवाह क्षेत्र से सुरक्षित दूरी पर है।
गैर मुमकिन श्रेणी में होने की वजह से इस भूमि के लेन-देन में अड़चन आती है। विकास कार्य नहीं हो पाते। आर्थिक गतिविधियाें को भी इस भूमि पर अंजाम देने में कानूनी अड़चन आती है। रिकॉर्ड में गैर मुमकिन श्रेणी दर्ज होने की वजह से बड़ी संख्या में ऐसे मामले कोर्ट में भी विचाराधीन हैं। सरकार अब इस भूमि को रिकॉर्ड में गैर मुमकिन श्रेणी से बाहर कर भूमि मालिकों को राहत देगी।