जम्मू। भाजपा एवं कश्मीरी पंडितोें के नेता अश्विनी कुमार च्रुगू और उत्पल कौल ने परिसीमन आयोग को संयुक्त पत्र लिखकर राज्यसभा और विधानसभा में कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
पत्र में बताया कि आयोग के समक्ष 26 मार्च, 2021 को नई दिल्ली कार्यालय और फिर जुलाई, 2021 को जम्मू में एक प्रस्तुति दी गई थी। इसमें बताया गया था कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों और कश्मीर के अन्य अल्पसंख्यकों का अलग मामला है, जिसकी भारतीय संविधान के संस्थापकों ने शायद कल्पना नहीं की थी। यह अपने ही देश में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं और कश्मीर घाटी के मूल निवासी हैं, इसलिए परिसीमन जैसे मसौदे को अंतिम रूप देते समय उनके मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए। आयोग संदर्भ की शर्तों और 2019 के जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के आधार पर काम कर रहा है, इसलिए पंडित समुदाय के मुद्दे को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। इसमें सरकार और संसद द्वारा उचित संवैधानिक उपाय शामिल किए जाएं। परिसीमन मुद्दा कश्मीरी पंडितों, कश्मीरी सिखों और पिछले तीन दशक से विस्थापन का दंश झेल रहे गैर कश्मीरी भारी हिंदुओं के विस्थापित समुदाय से जुड़ा है। यह उस राज्य में उनके सामाजिक राजनीतिक अस्तित्व का सवाल है जिसकी नींव उनके पूर्वजों ने रखी थी। विस्थापित समुदाय आयोग से सामूहिक न्याय और निष्पक्षता के सम्मान की प्रतीक्षा कर रहा है।