फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu Kashmir Elections: परिसीमन आयोग की बैठक 20 को, नेकां बोली-शामिल होने पर करेंगे विचार

Sun, 12 Dec 2021 02:12 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

नई दिल्ली में परिसीमन आयोग की बैठक 20 दिसंबर को होगी। उम्मीद की जा रही है कि सब कुछ ठीकठाक रहा तो इस महीने के अंत तक ड्राफ्ट रिपोर्ट सार्वजनिक किया जा सकता है। नेकां का कहना है कि फिलहाल बैठक कर शामिल होने पर सहमति बनाई जाएगी। लेकिन उसका शामिल होना तय माना जा रहा है। परिसीमन में सात सीटें बढ़ाई जानी हैं। इसके बाद 90 सदस्यीय विधानसभा हो जाएगी। पहले 87 सदस्यीय विधानसभा में चार सीटें लद्दाख की थीं। 
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर निकाय चुनाव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

परिसीमन आयोग की बैठक 20 दिसंबर को नई दिल्ली में होगी। इसमें आयोग के सहयोगी सदस्य के रूप में शामिल पांच सांसदों (भाजपा के दो व नेकां के तीन) को आमंत्रण दिया गया है। संभावना है कि आयोग विधानसभा सीटों के परिसीमन से संबंधित ड्राफ्ट रिपोर्ट को साझा कर सहयोगी सदस्यों की राय लेगा। इसके बाद इसे सार्वजनिक कर सुझाव तथा आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो इस महीने के अंत तक ड्राफ्ट रिपोर्ट सार्वजनिक किया जा सकता है।

विज्ञापन


नेकां का कहना है कि फिलहाल बैठक कर शामिल होने पर सहमति बनाई जाएगी। लेकिन उसका शामिल होना तय माना जा रहा है। परिसीमन में सात सीटें बढ़ाई जानी हैं। इसके बाद 90 सदस्यीय विधानसभा हो जाएगी। पहले 87 सदस्यीय विधानसभा में चार सीटें लद्दाख की थीं।  सूत्रों के अनुसार आयोग की रिपोर्ट में पिछले तीन साल से विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडितों को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। घाटी से पलायन के बाद देशभर के विभिन्न हिस्सों में कश्मीर पंडित बसे हुए हैं। इसके साथ ही पहाड़ी बोलने वालों को भी राजनीतिक आरक्षण दिया जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर डीडीसी चुनाव परिणाम - फोटो : अमर उजाला
आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई का कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त होने जा रहा है। इससे पहले आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने की उम्मीद है। इसके बाद जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवाए जाने की उम्मीद है। आयोग के पांच सहयोगी सदस्यों में पीएमओ में मंत्री व भाजपा के उधमपुर से सांसद डा. जितेंद्र सिंह व जम्मू से सांसद जुगल किशोर शर्मा, नेकां सांसद डा. फारूक अब्दुल्ला, मोहम्मद अकबर लोन और हसनैन मसूदी हैं। आयोग के गठन के बाद यह दूसरी बैठक बुलाई जा रही है। गत फरवरी में पहली बैठक के दौरान भाजपा सांसद शामिल हुए थे, लेकिन नेकां के तीनों सांसदों ने बहिष्कार कर दिया था। आयोग के दो आधिकारिक सदस्यों में मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा और राज्य चुनाव आयुक्त केके शर्मा शामिल हैं। 

 

जम्मू में बैठके के दौरान फारूक अब्दुल्ला। - फोटो : अमर उजाला
फारूक ने कहा-आमंत्रण नहीं मिला, मसूदी बोले-एजेंडा नहीं बताया
परिसीमन आयोग की आगामी 20 दिसंबर को नई दिल्ली में होने वाली प्रस्तावित बैठक के लिए सहयोगी सदस्यों में भाजपा और नेकां सांसदों को न्योता दिया गया है। नेकां सांसद हसनैन मसूदी ने कहा कि उन्हें बैठक के लिए आमंत्रण मिला है, लेकिन उसमें किसी एजेंडे का जिक्र नहीं किया गया है। हमें किसी भी तरह की ड्राफ्ट रिपोर्ट या कोई अन्य सामग्री नहीं दी गई है। बैठक में पार्टी हाई कमान के फैसले के बाद ही शामिल होंगे।

उधर, पार्टी अध्यक्ष व सांसद डा. फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि उन्हें आयोग की तरफ से भी कोई आमंत्रण नहीं मिला है। मसूदी ने कहा कि पार्टी नेतृत्व जल्द बैठक के मुद्दे पर चर्चा करके फैसला लेगा। हाल ही में डा. फारूक अब्दुल्ला सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने परिसीमन आयोग द्वारा अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने की समय सीमा के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। फारूक ने आरोप लगाया था कि परिसीमन पर उनसे कोई चर्चा नहीं की जा रही और न ही कोई रिपोर्ट साझा की गई है। 

 
विज्ञापन

जम्मू-कश्मीर निकाय चुनाव - फोटो : अमर उजाला
पहली बार अनुसूचित जनजाति को आरक्षण
जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा में अनुसूचित जनजाति को आरक्षण दिया गया है। अनुसूचित जाति को सात तथा जनजाति को 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है। अनुसूचित जाति की आबादी केवल जम्मू संभाग में है। जनजाति राजोरी, पुंछ के अलावा उत्तरी व दक्षिणी कश्मीर में हैं। 

पीओजेके के लिए 24 सीटें आरक्षित
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार विधानसभा में कुल 114 सीटें होंगी। इसमें पीओजेके की 24 सीटें रिक्त रहेंगी। 90 सीटों पर चुनाव होंगे। पहले 104 सीटें थीं जिसमें 24 सीटें पीओजेके की थीं। 87 सदस्यीय विधानसभा में चार सीटें लद्दाख की थीं। इसके साथ ही जम्मू में 37 व कश्मीर में 46 सीटें थीं। लद्दाख की सीटें हटने के बाद 83 सीटें रह गईं जिसमें सात सीटों को बढ़ाया जाना है। 1994 में हुए परिसीमन में सीटों की संख्या 76 से बढ़कर 87 हुई थी। इसमें जम्मू की सीटें 32 से 37 तथा कश्मीर की 42 से 46 हो गई थीं। लद्दाख में भी दो सीटें बढ़ीं थी और संख्या चार हो गई थी। फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेकां सरकार ने 2002 में परिसीमन को फ्रीज कर दिया था। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें