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General Bipin Rawat: सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने ही घाटी में ऑपरेशन ऑल आउट चलाकर आतंकी संगठनों की तोड़ी कमर

Thu, 09 Dec 2021 12:38 AM IST
विमल शर्मा अजय मीनिया, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशनों को सीडीएस रावत ने ही अंजाम दिया था। किस्तान को सीजफायर तोड़ने पर कड़ा जवाब देने का आदेश भी रावत ने ही सेना को दिया। 
 
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सीडीएस जनरल बिपिन रावत फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत बड़े सैन्य ऑपरेशन के लिए जाने जाते थे। खासकर जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन ऑल आउट शुरू कर उनके नेतृत्व में कई सफल आतंकी ऑपरेशनों को अंजाम दिया गया। यही नहीं, सर्जिकल व एयर स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन भी उनकी देखरेख में हुए।

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पाकिस्तान को एलओसी पर कड़ा जवाब दिया
पाकिस्तान को सीजफायर तोड़ने पर कड़ा जवाब देने का आदेश भी रावत ने ही सेना को दिया। उनके कार्यकाल में पाकिस्तान को एलओसी पर कड़ा जवाब दिया गया। एक गोली के बदले पाकिस्तान को 10 गोलियों का जवाब देने का आदेश उन्होंने ही सेना को दिया था। यूं कहा जाए कि पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए सेना के सख्त कदमों को बिपिन रावत की देखरेख में उठाया गया। 

21 जून 2015 को जब यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट के आतंकियों ने मणिपुर में सेना के 18 जवानों को घात लगाकर शहीद कर दिया, तब सेना ने म्यांमार में घुसकर इन आतंकियों को मारकर बदला लिया। इस ऑपरेशन को दीमापुर में मौजूद 21 पैराशूट रेजिमेंट के जवानों ने अंजाम दिया। इस रेजिमेंट की कमान संभालने वाले बिपिन रावत ही थे। उनकी प्लानिंग से ही पैरा कमांडो ने यूएलएफ के आतंकियों को मारा। 

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सीडीएस बिपिन रावत - फोटो : पीटीआई
सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाने में रावत भी शामिल
29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने पीओके में घुसकर उड़ी और पुंछ सेक्टर में आतंकियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की। तब बिपिन रावत सेना के उपाध्यक्ष थे। सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाने में रावत भी शामिल थे। वह उस ग्रुप में शामिल थे, जो इस स्ट्राइक की लगातार की निगरानी कर रहे थे।  
 
उड़ी में बतौर मेजर मिली थी पहली कंपनी की कमान
2019 में पाकिस्तान पर बालाकोट एयर स्ट्राइक के वक्त रावत सेना के चीफ थे। 2015 में म्यांमार स्ट्राइक, 2016 पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन में उनकी मौजूदगी थी। उनको कश्मीर के उड़ी और सोपोर समेत एलओसी की खासी जानकारी थी।

उन्हें अपना पहला बड़ा पद भी कश्मीर में बतौर मेजर मिला था, जिसमें उड़ी में सेना की एक कंपनी की कमान मिली थी। इसके अलावा वह सोपोर में सेक्टर पांच की राष्ट्रीय राइफल के बिग्रेडियर रहे। उन्हें उड़ी में 19 इनफैंट्री डिवीजन के जीओसी की कमान मिली। अपने कार्यकाल में वह तीन बार कश्मीर के अहम हिस्सों में तैनात रहे और उनकी मौजूदगी में सेना ने आतंकियों के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन किए।
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सीडीएस बिपिन रावत - फोटो : Social Media
 आखिरी बार एलओसी पर 23 अक्तूबर को नौशेरा आए थे 
जनरल रावत जम्मू-कश्मीर में इसी वर्ष 23 अक्तूबर को आए थे। यहां उन्होंने नौशेरा एलओसी की अग्रिम चौकियों का दौरा किया और एलओसी की सुरक्षा बंदोबस्त की समीक्षा की। एलओसी व आईबी पर पाकिस्तान की ड्रोन की हलचलों के बीच उन्होंने एलओसी पर पहुंचकर जवानों को दुश्मनों की नापाक हरकतों को नाकाम करने को कहा था। 
 
370 हटने के बाद घाटी के हालात को रखा नियंत्रण में
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी उन्होंने अपनी सूझबूझ से कश्मीर के हालातों पर नियंत्रण रखा। भारी संख्या में सेना की तैनाती कर कश्मीर में हालात सामान्य रखे। उन्होंने इस दौरान एलओसी के साथ ही मैदानी इलाकों में जवानों की तैनाती व समन्वय के साथ कई दौरे कर पूरी स्थिति को नियंत्रण में रखा। 
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