जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद फारूक अब्दुल्ला ने विपक्षी दलों को बैठक बुलाई है। इसमें शामिल होने के लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विकार रसूल वानी, कांग्रेस नेता रमन भल्ला, सीपीआईएम के नेता तारिगामी सहित प्रदेश की अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता पहुंच चुके हैं।
जम्मू शहर में मंगलवार को विपक्षी दलों की बैठक हो रही है। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद फारूक अब्दुल्ला ने विपक्षी दलों को बैठक बुलाई है। इसमें शामिल होने के लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विकार रसूल वानी, कांग्रेस नेता रमण भल्ला, सीपीआईएम के नेता एम वाई तारिगामी सहित प्रदेश की अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता पहुंच चुके हैं।
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बौठक को लेकर एम वाई तारिगामी ने कहा कि विपक्षी दलों के नेता जम्मू-कश्मीर में उभरती स्थिति पर चर्चा करने और भाजपा की जनविरोधी नीतियों का मुकाबला करने के लिए एक आम रणनीति विकसित करने के लिए मिल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर भाजपा के लिए स्लिपरी स्लोप बन गया है।
तारिगामी ने दावा किया कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने कथित तौर पर 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद शहरी स्थानीय निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव कराने का फैसला किया है, जो मूल रूप से इस साल के अंत में होने वाले थे। हालांकि इस पर अभी पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा सामान्य स्थिति और शांति की बहाली के बारे में शोर मचा रही है, लेकिन दूसरी तरफ स्थानीय चुनाव कराने से भी हिचकिचा रही है।
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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विकार रसूल वानी ने कहा कि विपक्षी नेता जनता के व्यापक हित में एक साथ बैठेंगे और अगली रणनीति पर बनाएंगे। उन्होंने कहा, 'भाजपा ने केवल जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए दुख पैदा किया है। हम इसके खिलाफ लड़ रहे हैं और अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।'
रसूल वानी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद भाजपा ने जम्मू-कश्मीर को देश में नंबर एक बनाने का वादा किया था, लेकिन चार साल बाद हम जम्मू-कश्मीर को भ्रष्टाचार और बेरोजगारी में नंबर एक स्थान पर पाते हैं, जबकि हाल के आतंकवादी हमलों ने पार्टी के शांति के दावे की पोल खोल दी है।